जहां कभी बंटे थे दिल, वहीं आज जुड़े हाथ; सहारनपुर में 12 साल बाद मिटी दंगों की दीवार
सहारनपुर में 12 साल पुराने गुरुद्वारा भूमि विवाद का सुखद अंत हुआ है. जिस जमीन को लेकर 2014 में दंगे भड़के थे, आज वहीं मुस्लिम समाज के लोगों ने गुरुद्वारे के निर्माण में कार सेवा की. सीमेंट, बजरी उठा कर श्रमदान किया, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की गई.
जिस जमीन को लेकर साल 2014 में सहारनपुर सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस गया था, उसी स्थान से अब भाईचारे और सौहार्द का संदेश निकला है. 12 साल पहले जिस जमीन को लेकर कभी दोनों समुदाय आमने-सामने थे, पत्थरबाजी, आगजनी और गोलियां चली थीं. उसी स्थान पर गुरुद्वारे के निर्माण कार्य में मुस्लिम समाज के लोगों ने पहुंचकर कार सेवा की.
साल 2014 में रेलवे स्टेशन के पास स्थित ऐतिहासिक श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे से सटी भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ था. गुरुद्वारा प्रबंधन का दावा था कि जमीन वैध रूप से खरीदी गई है. जबकि मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ संपत्ति बता रहा था. इसके बाद विवाद हिंसक हो गए. दंगों में कई लोग घायल हुए, 200 से अधिक दुकानें जल गईं और 80 से ज्यादा FIR किए गए थे.
मुस्लिम समाज ने 4 लाख का चेक लौटाया था
इसके बाद लंबे समय तक मामला अदालत और प्रशासनिक स्तर पर चलता रहा. साल 2020 में प्रशासन की पहल पर दोनों समुदायों के बीच कई दौर की वार्ता हुई. गुरुद्वारा प्रबंधन ने मस्जिद निर्माण के लिए 4 लाख रुपये का चेक मुस्लिम समाज को दिया. लेकिन मुस्लिम समाज ने राशि लौटा दी और कहा कि इसे गुरुद्वारे के निर्माण में ही लगाया जाए.
इतना ही नहीं, मुस्लिम समाज ने यह भी घोषणा की कि मस्जिद का निर्माण समाज अपने संसाधनों से करेगा. इसी समझौते के दौरान मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि मुहर्रम अली उर्फ पप्पू ने वादा किया था कि जब भी गुरुद्वारे का निर्माण शुरू होगा, वह सबसे पहले पहुंचकर कार सेवा करेंगे. छह साल बाद वह वादा मंगलवार को पूरा होता दिखाई दिया.
मुस्लिम समाज ने गुरुद्वारा पहुंच किया श्रमदान
गुरुद्वारे में लिंटर डालने का कार्य शुरू हुआ तो मुस्लिम समाज के लोग निर्माण स्थल पर पहुंचे और कार सेवा करते हुए सीमेंट, बजरी और अन्य निर्माण सामग्री उठाकर श्रमदान किया. गुरुद्वारा प्रबंधन और मुस्लिम समाज के लोगों ने एक-दूसरे का गले लगाकर स्वागत किया. गुरुद्वारा सिंह सभा की ओर से प्रतिनिधियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया.
सिख समाज के वरिष्ठ नेता सरदार गुरप्रीत सिंह बग्गा ने कहा कि कुछ लोग सालों तक इस विवाद को राजनीति का मुद्दा बनाए रखना चाहते थे, लेकिन दोनों समाजों ने मिलकर उस अध्याय को हमेशा के लिए बंद कर दिया. उन्होंने बताया कि साल 2020 से लगातार संवाद और विश्वास बहाली की कोशिशें चल रही थीं, जिनका परिणाम आज पूरे समाज के सामने है.
12 साल बाद नफरत पर भाईचारे की जीत
वहीं, 2014 के विवाद के प्रमुख आरोपियों में शामिल रहे मुहर्रम अली उर्फ पप्पू ने कहा कि उस समय 80 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे, लेकिन उनकी हमेशा यही इच्छा रही कि दोनों समाजों के बीच पैदा हुई दूरियां समाप्त हों. उन्होंने कहा कि 2020 में जो वादा किया था, आज कार सेवा करके पूरा किया है. विवाद की जगह भाईचारे को चुनना ही सबसे बड़ी जीत है.
करीब 12 सालों तक सहारनपुर की राजनीति और सामाजिक चर्चा का केंद्र रहे इस गुरुद्वारा भूमि विवाद का अब प्रतीकात्मक और सामाजिक रूप से भी पटाक्षेप हो गया है. जिस स्थान पर कभी तनाव, हिंसा और अविश्वास का माहौल था, वहीं आज सिख और मुस्लिम समाज के लोग कंधे से कंधा मिलाकर निर्माण कार्य करते दिखाई दिए.