सहारनपुर: PNB में 17.29 करोड़ की नकली करेंसी का मामला, NIA ने बैंक अधिकारी को दबोचा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सहारनपुर PNB की करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों के मामले में फरार चल रहे एक बैंक अधिकारी को गिरफ्तार किया है. आरोपी को लखनऊ से दबोचा गया है. NIA बैंक के अंदर-बाहर जुड़े लोगों की भी जांच कर रही है. यह गिरफ्तारी घोटाले की तह तक जाने में महत्वपूर्ण है.

NIA ने बैंक अधिकारी अमित कुमार को किया गिरफ्तार Image Credit:

सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में मिली 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है. मामले में फरार चल रहे बैंक अधिकारी अमित कुमार को NIA ने गिरफ्तार कर लिया है. PNB की करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट रखकर असली उड़ाने के आरोप है.

मामला सामने आने के बाद PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने 29 अगस्त को सदर बाजार थाने में FIR दर्ज कराई थी. इसमें वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट के पूर्व प्रबंधक सुशील शर्मा और हरियाणा के यमुनानगर-जगाधरी स्थित खेड़ा बाजार करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार शामिल हैं. अमित के अलवा, अन्य दोनों फरार हैं.

कस्टोडियन की भूमिका में थे अमित कुमार

शुरुआती जांच में तीनों की भूमिका सामने आने के बाद बैंक ने उन्हें निलंबित कर दिया था. वहीं, NIA के हत्थे चढ़े अमित कुमार उस समय PNB में करेंसी चेस्ट मैनेजर और ज्वाइंट कस्टोडियन के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे. करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकदी के रखरखाव और उसकी सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों में कस्टोडियन की भूमिका अहम होती है.

यही वजह है कि 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों की बरामदगी के मामले में अमित कुमार की भूमिका जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वह मामला सामने आने के बाद से फरार था और अब NIA की गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ में कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.

पहले 7.40 करोड़ ही आंकी गई थी नकली नोट

PNB की करेंसी चेस्ट में नकली नोटों का मामला 29 अगस्त को सामने आया. इसके बाद बैंक स्तर पर भी जांच शुरू हुई और करेंसी की गिनती तथा सत्यापन का काम आगे बढ़ाया गया. शुरुआती जांच में करीब 7.40 करोड़ रुपय नकली नोट आंकी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे करेंसी का ऑडिट और सत्यापन आगे बढ़ा, यह 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

जांच में यह आशंका भी सामने आई कि करेंसी चेस्ट में असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए होंगे. मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच NIA को सौंपी गई. NIA ने 3 सितंबर को दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की. NIA के मुताबिक, शुरुआती पुलिस केस 29 अगस्त को सदर बाजार थाने में BNS की धारा 178 के तहत दर्ज हुआ था.

इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आए कहां से?

अमित कुमार की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है. NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आखिर आए कहां से. क्या इन्हें किसी संगठित नेटवर्क के जरिए तैयार कर बैंकिंग सिस्टम में पहुंचाया गया या फिर करेंसी चेस्ट के स्तर पर ही असली और नकली नोटों की अदला-बदली की गई?

इसके साथ ही जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि नकली नोटों के बदले कथित तौर पर निकाली गई असली करेंसी कहां गई. बैंक अधिकारियों की भूमिका क्या थी. इस पूरी प्रक्रिया में कोई बाहरी व्यक्ति या नेटवर्क शामिल था या नहीं. इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. साथ ही मामले में फरार दो अन्य आरोपियों की भी तलाश तेज है.

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