शहजाद से बने शंकर युवक का उसके पैतृक गांव बहेड़ी गुर्जर में भव्य स्वागत, परिवार सहित अपनाया है सनातन धर्म
सहानरपुर के शहजाद ने 21 मई को हरिद्वार के ब्रह्मकुंड स्थित आर्य समाज मंदिर में पत्नी और बच्चों के साथ वैदिक रीति-रिवाजों के बीच सनातन धर्म अपनाया था. धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम शंकर, पत्नी रजिया का नाम सावित्री, बेटे रेहान का नाम रुद्र, बेटी मुस्कान का नाम रुक्मिणी तथा दूसरी बेटी रोजी का नाम दीक्षा रखा था. अब शहजाद उर्फ शंकर का उनके पैतृक गांव में भव्य स्वागत किया गया.
हरिद्वार में 21 मई को शहजाद नाम का युवक सनातन धर्म अपनाकर शंकर बन गया. अब शहजाद उर्फ शंकर का उसके पैतृक गांव बहेड़ी गुर्जर पहुंचने पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया. इस दौरान गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण जी महाराज भी उसके साथ मौजूद रहे. गांव में ढोल-नगाड़ों, पुष्पवर्षा और जयघोष के बीच शंकर और उनके परिवार का स्वागत किया गया.
परिवार समेत शहजाद ने अपनाया था हिंदू धर्म
गागलहेड़ी क्षेत्र के बहेड़ी गुर्जर निवासी शहजाद ने 21 मई को हरिद्वार के ब्रह्मकुंड स्थित आर्य समाज मंदिर में पत्नी और बच्चों के साथ वैदिक रीति-रिवाजों के बीच सनातन धर्म अपनाया था. धर्म परिवर्तन के बाद उन्होंने अपना नाम शंकर, पत्नी रजिया का नाम सावित्री, बेटे रेहान का नाम रुद्र, बेटी मुस्कान का नाम रुक्मिणी तथा दूसरी बेटी रोजी का नाम दीक्षा रखा था.
फकीरदास मंदिर में की पूजा अर्चना
गांव लौटने से पहले शंकर अपने परिवार के साथ देवबंद के मिरगपुर स्थित प्रसिद्ध बाबा फकीरदास मंदिर पहुंचा. पूजा-अर्चना कर बाबा फकीरदास का आशीर्वाद लिया. मंदिर परिसर में संतों और श्रद्धालुओं ने भी उनका स्वागत किया.पैतृक गांव बहेड़ी गुर्जर पहुंचने पर शंकर ने सबसे पहले मंदिर में पूजा-अर्चना की और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया. ग्रामीणों और महिलाओं ने तिलक लगाकर तथा फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया.
‘कट्टरता से थे परेशान इसलिए अपनाया सनातन धर्म’
मीडिया से बातचीत में शंकर ने कहा कि वह लंबे समय से सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति से प्रभावित थे. उनका कहना है कि जीवों की हत्या, धार्मिक कट्टरता और कुछ कट्टरपंथी विचारधाराओं से वह मानसिक रूप से परेशान थे. उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में कट्टरता को बढ़ावा देने वाली सोच से वह सहमत नहीं थे. इसी कारण उन्होंने अपने परिवार के साथ सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया.
‘बच्चों के भविष्य के लिए फैसला’
शंकर ने आगे कहा कि वह अब खुलकर अपने धार्मिक विश्वास के अनुसार जीवन जीना चाहते हैं. उन्होंने अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है. गांव के लोगों ने उनके निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि शंकर का परिवार अब खुले तौर पर अपनी आस्था के अनुसार जीवन जी रहा है.
