‘कोई मुसलमान ऐसा करे तो…’ आमिर ख़ान की तीसरी शादी पर देवबंदी उलेमा का बड़ा बयान
मौलाना कारी इशहाक गोरा ने लोगों की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आख़िर हमारी सोच में यह दोहरापन क्यों है? हमें दूसरों के निजी मामलों को बेवजह दखल देकर विवाद करने की जरूरत क्या है? इसे विषय बनाने के बजाय हमें अपनी सोच और अपने रवैये की इस्लाह करने की ज़रूरत है.
बॉलीवुड अभिनेता आमिर ख़ान की तीसरी शादी को लेकर देशभर में बवाल मचा है. इस मुद्दे पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. इस बीच मशहूर देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा का बयान भी सुर्खियों में है. उन्होंने कहा कि इस शादी पर आपत्ति करने वालों को खरी खोटी सुनाई है. कहा कि किसी भी मामले में दोहरे मापदंड (डबल स्टैंडर्ड) अपनाना उचित नहीं. उन्होंने कहा, “जब मियां-बीवी राज़ी, तो क्या करेगा क़ाज़ी?
मौलाना ने कहा कि अगर कोई बालिग व्यक्ति अपनी मर्ज़ी से और कानून के दायरे में रहकर कोई फैसला करता है, तो यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति उस पर फ़ैसले सुनाता फिरे. यह अफ़सोस की बात है कि जब कोई मुसलमान ऐसा करता है तो उस पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाए जाते हैं. यहां तक कि उसे “लव जिहाद” जैसे विवादों से भी जोड़ने की कोशिश की जाती है. वहीं, जब यही काम किसी दूसरे समुदाय का व्यक्ति करता है तो कहा जाता है कि “मोहब्बत के आगे मज़हब की दीवार टूट गई”.
मौलाना ने उठाया सवाल
मौलाना कारी इशहाक गोरा ने लोगों की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आख़िर हमारी सोच में यह दोहरापन क्यों है? हमें दूसरों के निजी मामलों को बेवजह दखल देकर विवाद करने की जरूरत क्या है? इसे विषय बनाने के बजाय हमें अपनी सोच और अपने रवैये की इस्लाह करने की ज़रूरत है. देश के सामने शिक्षा, बेरोज़गारी, महंगाई, सामाजिक सद्भाव और तरक़्क़ी जैसे अनेक अहम मुद्दे मौजूद हैं. हमारी तवज्जो उन विषयों पर होनी चाहिए जो समाज और देश के लिए वास्तव में फ़ायदेमंद हों.
न्यायपूर्ण नजरिए रखे समाज
मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर न्यायपूर्ण और एक जैसा नज़रिया अपनाना ही इंसाफ़ और सभ्य समाज की पहचान है. समाज को चाहिए कि इस तरह के मामलों में कोई भेदभाव ना रखे. बता दें कि आमिर खान ने बीते 5 जुलाई को एक निजी समारोह में गौरी स्प्रैट के साथ तीसरी शादी की है. इस शादी में उनकी दोनों पूर्व पत्नियां (रीना दत्ता और किरण राव) भी शामिल हुईं थीं.
