कृपाण थी साथ… एंट्री पर रोका; यूपी SI परीक्षा देने पहुंचे सिख युवक के साथ फिर क्या हुआ?
यूपी SI परीक्षा देने पहुंचे एक सिख युवक को कृपाण धारण करने के कारण एंट्री से रोका गया. उसे कृपाण उतार को बोला गया लेकिन वह नहीं माना. पहली पाली में परीक्षा की थी, उसका पेपर छूट गया. इससे परेशान होकर युवक ने अपने परिजनों और सिख समाज के लोगों से संपर्क किया. फिर मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा, इसके बाद...
यूपी पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के दौरान शनिवार को पहली पाली में एक सिख युवक को प्रवेश से रोक दिया गया. युवक को सहारनपुर के एचएवी इंटर कॉलेज केंद्र पर पहुंचा था. चेकिंग के दौरान उनके पास सिख परंपरा के अनुसार धारण की गई कृपाण पाया गया. इसपर ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं करने दिया.
उत्तराखंड के जसपुर निवासी जसबीर सिंह को पहली पाली में परीक्षा देना था, जसबीर सिंह ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने सिख धर्म के अनुसार अमृत छक रखा है, इसलिए वह कृपाण उतार नहीं सकते. उनका कहना था कि वह पहले भी कई परीक्षाएं कृपाण के साथ दे चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी बात नहीं सुनी गई और उनका पहली पाली का पेपर छूट गया.
DM मनीष बंसल ने लिया संज्ञान, फिर क्या हुआ?
इससे परेशान होकर जसबीर सिंह ने अपने परिजनों और सिख समाज के लोगों से संपर्क किया. इसके बाद सिख समाज के लोगों ने सहारनपुर के गुरुद्वारा सिंह सभा के पदाधिकारियों को मामले से अवगत कराया. मामले की जानकारी मिलने पर गुरु नानक बॉयज के प्रबंधक जसवंत सिंह बत्रा सहित सिख समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को पूरी स्थिति बताई.
सहारनपुर के जिलाधिकारी मनीष बंसल के सामने जसबीर सिंह ने भी एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी समस्या रखी. मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी मनीष बंसल ने मानवता का परिचय देते हुए नियमानुसार युवक को दूसरी पाली में परीक्षा देने के निर्देश दिए. इसके बाद जसबीर सिंह ने दूसरी पाली में परीक्षा दी, और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया.
‘एक समय ऐसा लगा कि संविधान से भरोसा उठ गया’
TV9 से बातचीत में जसबीर सिंह ने कहा कि एक समय ऐसा लगा कि उनका संविधान से भरोसा उठ गया है, लेकिन बाद में जिस तरह सिख समाज के जिम्मेदार लोगों ने मदद की और जिलाधिकारी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें परीक्षा देने का मौका दिया, उसके लिए वह दिल से आभारी हैं. जसबीर, फिलहाल जसपुर में एक प्राइवेट शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.