घर बेचकर लोन दे देना, बाकी इंश्योरेंस तुम्हारे नाम… सुसाइड नोट में सचिन ग्रोवर ने क्यों कही ये बात?

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के हैंडलूम कारोबारी सचिन ग्रोवर ने 13 पन्ने के सुसाइड नोट में भाई रोहत के नाम का जिक्र किया है. उन्होंने लिखा कि मेरे मरने के बाद घर बेचकर बैंक के लोन का सेटलमेंट कर देना. बाकी गाड़ियों का इंश्ययोरेंस सब तुम्हारा है.

सचिन ग्रोवर और शिवांगी ग्रोवर Image Credit:

परिवार और अपनों का साथ किसी पेड़ की उस जड़ की तरह होता है, जो हर मुसीबत में पेड़ को उखड़ने नहीं देता है. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के सुसाइड केस में कारोबारी सचिन ग्रोवर के जीवन में उसके अपने ने ही उसकी जड़ों को कमजोर और खोखला बना दिया, जिसका हश्र आज दुनिया के सामने है. सचिन जीवन की जंग से हार गया. इतना असहाय हुआ कि उसने अपने बच्चो और पत्नी को भी खुद के बाद अकेला छोड़ना नहीं समझा. सचिन ग्रोव ने अपने 13 पन्नों के सुसाइड नोट में कई ऐसे खुलासे किए, जिसे जानने के बाद उसके असहाय होने की भावनाओं को थोड़ा करीब से समझा जा सकता है.

दोस्त और भाइयों ने उठाया मौके का फायदा

सुसाइड नोट में सचिन ग्रोवर ने साफ लिखा है कि उसने आर्थिक तंगी, दोस्तों और सूदखोरों से परेशान होकर यह कदम उठाया. उसने आरोप लगाया कि दोस्त शैंकी आनंद 30 प्रतिशत ब्याज पर पैसे देता था और लगातार मानसिक प्रताड़ना करता था. बैंक का कर्ज, रोज़ाना ब्याज चुकाने का दबाव और परिवार के भीतर सहयोग न मिलने से वह टूट चुका था.

लॉकडाउन के समय से जिंदगी बर्बाद हो गई

सचिन ने सुसाइड नोट में लिखा कि जब यह लेटर किसी को मिलेगा, तब तक मैं, मेरी बीवी और बेटा इस दुनिया में नहीं रहेंगे. मेरी जिंदगी लॉकडाउन के समय बिजनेस शुरू करने के बाद से बर्बाद हो गई. फैक्ट्री, घर और गहने सब गिरवी रखे गए. मेरे अपने भाइयों और परिवार ने भी कोई साथ नहीं दिया.

उसने बताया कि एक दोस्त से लिए 2 लाख रुपए पर उसे रोज़ 2 हजार रुपये ब्याज चुकाना पड़ता था. भाई गौरव और चाचा पवन पर भी आरोप लगाए कि उन्होंने मदद करने के बजाय घर बिकवाने का दबाव बनाया. सुसाइड नोट में सचिन ने लिखा “मेरे दोस्त शैंकी और उसके साथियों ने मुझे समाज में बदनाम किया, मेरी पत्नी की छवि खराब की. मैंने हर कर्ज ब्याज सहित लौटाया, लेकिन धोखे और अपमान ने मुझे तोड़ दिया.”

घर बेचकर बैंक का सेटलमेंट कर देना

उसने यह भी कबूला कि उसने शराब का धंधा किया था, जिससे पैसा मिला लेकिन पकड़े जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई. सचिन ने माना कि परिवार और रिश्तेदारों के दबाव व मानसिक उत्पीड़न ने उसकी पत्नी को भी परेशान किया.

अपने बड़े भाई रोहित के नाम लिखते हुए सचिन ने लिखा, “मेरे मरने के बाद घर बेचकर बैंक का सैटलमेंट कर देना. कार, स्कूटी, मोबाइल, इंश्योरेंस सब तुम्हारा है रोहित. भाई के साथ न पाने की वजह से टूटे सचिन ने अंतिम समय में भाई को ये आखिरी जिम्मेदारी सौंपी कि मेरे जाने के बाद तुम्हें अपना कुछ भी नहीं देना होगा. सचिन ने आगे लिखा कि मैंने शिवांगी की जिंदगी भी बर्बाद कर दी, हो सके तो मुझे माफ कर देना.”

यह सुसाइड नोट सामने आने के बाद पुलिस की जांच और तेज हो गई है. अब यह देखना होगा कि ग्रोवर परिवार को आत्महत्या के लिए उकसाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है. यह मामला न सिर्फ परिवारिक कलह और कर्ज के दबाव की कहानी बयां करता है, बल्कि समाज में सूदखोरी और दोस्ती के नाम पर धोखे की भयावह तस्वीर भी उजागर करता है.

वहीं दूसरी ओर शिवांगी की मां संध्या मिश्रा की ओर से दी गई तहरीर पर रोजा थाने में शेंकी आनन्द, विक्की बग्गा देवांग खन्ना सहित एक अज्ञात सूदखोरों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.