‘अधिकारी आदेश का गुलाम, असली दोषी मुख्यमंत्री’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा हमला
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिन में गौमाता को राज्यमाता घोषित करने का अल्टीमेटम दिया, वरना उनके 'हिंदू' होने पर सवाल उठाए. शंकराचार्य ने माघ मेले के दौरान अपने अपहरण का भी आरोप लगाया. साथ ही मुगल शासकों से सीएम योगी की तुलना पर भी अपनी बात रखी.
प्रयागराज माघ मेले छोड़ने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वाराणसी स्थित अपने शिविर में है. कई दिनों से घिरे विवादों के बीच रविवार को उन्होंने TV9 के साथ एक खास बातचीत की, जिसमें कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. इस दौरान उन्होंने गोहत्या पर बैन, गाय को राज्यमाता का दर्जा और मुख्यमंत्री को मुगल शासक कहने पर भी बात की.
शंकराचार्य का कहना है कि यह पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन सगम स्नान के वक्त जन्म लिया. जहां प्रशासन ने उन्हें पालकी से नीचे उतारने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हमने कहा कि यहां से 5 किलोमिटर दूरी तक हम पालकी से जाएंगे, उसके बाद पैदल चलेंगे. लेकिन हमारे बटुकों से मारपीट की गई और उन्हें खुद अपहृत किया गया.
मैं पालकी पर बैठा था इसलिए बच गया- अविमुक्तेश्वरानंद
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि माघ मेले में उनके बटुकों से मारपीट की गई. फिर उन्हें पकड़कर टेंट में ले गए, जब हम अकेले थे तो कुछ सफेद पोशाक में अधिकारी मेरा अपहरण कर इधर-उधर धुमाया. अगर मैं उस समय अपने पालकी से उतर जाता तो हमारी हत्या हो सकती थी. अगर मारने का उद्देश्य नहीं था तो मुझे अगवा करके क्यों ले जाया गया?
उन्होंने कहा, ‘हमें पालकी से नीचे उतारने की कोशिश थी. मैं पालकी पर बैठा था इसलिए बच गया, उतर जाते तो भड़दड़ बताकर हमारी हत्या हो सकती थी.’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रयागराज मेला प्रशासन को शंकराचार्य की सूचना पहले से ही रहती है, कल्पवासी थाने के पुलिस ने हमें कहा भी था कि आपको ले जाने की जिम्मेदारी मेरी है.
शंकराचार्य का CM योगी के साथ किस बात का विरोध है?
शंकराचार्य ने कहा कि हमारे और योगी के बीच कोई अंत कलह नहीं है. मुख्यमंत्री रहते हुए गो-मांस का निर्यात न रोकना और गोमाता को राज्यमाता घोषित न करना ही हमारे बीच का विरोध है. काशी में मुर्तियों को तोड़ने में उनका जो रोल है, यही हमारे बीच का विरोध है इसके अलावा हमारा मुख्यमंत्री योगी से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है.
उन्होंने कहा कि हमारी मांग, जो हमने कहा है वह हिंदूओं की आस्था है, गो-हत्या बहुत बड़ा पाप है. इसलिए हमने 40 दिन का समय दिया है कि राज्य में गो-हत्या पूरी तरह से बैन हो और गौ माता को राज्यमाता घोषित किया जाय. मुझे लगता है कि योगी सरकार इसे मान ले लेगी, हम 40वें दिन जाकर योगी आदित्यनाथ से मिलेंगे औऱ उनकी सराहना करेंगे.
CM योगी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए करेंगे जनता से अपील
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गो-माता की हत्या बंद करना सीएम योगी का कर्तव्य भी है, क्यों कि वह गोरक्षापीठ के महंत भी हैं, मुख्यमंत्री होने के बाद भी वह वहां के फूल टायम महंत हैं. ऐसी स्थिति में यह उनका दायित्व बनता है. मैं इसको लकेर मुखर हूं और उनसे सवाल किया जाता है इसलिए यह सब हमारे साथ किया गया.
उन्होंने कहा,’ अगर सीएम योगी कहतें हैं कि वो गो-हत्या पर रोक और गोमाता को राज्यमाता घोषित नहीं करेंगे, तो हम कहेंगे कि गो-मांस का निर्यात करने वाला व्यक्ति हिंदू नहीं हो सकता है. अगर मान लिया जाता है तो हम पूरे देश की जनता से अपील करेंगे कि यह सच्चा हिंदू है, गोमाता का भक्त, इन्हें प्रधानमंत्री बनाएये. हम इसके लिए काम करेंगे.
मुगल शासकों से सीएम योगी की तुलना पर क्या बोले?
मुगल शासकों से सीएम योगी की तुलना पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘मुगलों ने ही मंदिरों को तोड़ा था, हम अपने पूर्वजों से और इतिहास में भी इसे पढ़ते आए हैं. इससे यही धारणा बनी है कि जो हमारे मंदिरों और भगवान की मुर्तियों को तोड़ता वो मुगल ही है, ऐसा अगर मेरी सगा भाई भी करता है तो हम उसे औरंगजेब ही कहेंगे.’
कालनेमि पर उन्होंने कहा कि, ‘ठीक है अगर लेकिन उसको सिद्ध करके दिखाना होना. मैंने औरंगजेब कहा उसे मैं तर्क के साथ बता रहा हूं. वो बताएं कि हम संजीवनी लाने जा रहे हनुमान जी को कहां रोक रहे हैं. हमने तो बता दिया औरंगजेब क्यों कहा वो बताएं कि कालनेमि उन्होंने क्यों कहा. अगर हमसे कुछ नाराजगी थी तो हमारे बटुकों को क्यों पीटा गया.’
‘अधिकारी आदेश का गुलाम, असली दोषी मुख्यमंत्री’
शंकराचार्य ने आगे कहा, ‘ क्या वे पुलिस से पूछ नहीं सकते थे कि बाल ब्राह्मणों को क्यों पीटा गया. साल 2015 में भी हमने कहा था कि अधिकारी तो केवल आदेश का गुलाम होता है, असली दोषी मुख्यमंत्री है, हमने न तब अधिकारी पर दोष नहीं लगाया था और अब भी नहीं लगा रहे हैं. 11 दिन से शंकराचार्य धरने पर बैठे हैं, लेकिन उन्होंने कोई पहल नहीं की.
उन्होंने कहा कि गो-माता की हत्या बंद करने के लिए कहा तो हमारे साथ ऐसी हरकत की गई. यही सीधा कारण है. क्या योगी आपकी हत्या करना चाहते थे? इसपर शंकराचार्य ने कहा कि, ‘अभी तक तो यही लग रहा है क्योंकि, उन्होंने इसपर कुछ नहीं कहा. इससे यही पता चलता है कि यह सब उनके निर्देश पर किया गया.’
प्रयागराज में नहीं, वाराणसी में शंकराचार्य ने किया स्नान
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपना विरोध खत्म करने पर भी बात की. उन्होंने कहा कि प्रयागराज माघ मेले की बात तो अब अगले साल मेला के दौरान होगी. अभी मैंने अपना विरोध खत्म कर दिया है. इसकी के साथ शंकराचार्य ने टीवी9 के कैमरे के सामने वाराणसी में पवित्र गंगा नदी के जल को अपने ऊपर छिड़कर बताया कि वो स्नान कर लिए.
शंकराचार्य कहा कि वाराणसी में गंगा का जल प्रयागराज से होते ही आता है, वे गंगा मैया के सामने साष्टांग प्रणाम भी किए और कहा कि मैंने अब गंगा जी में स्न्ना कर लिया है.
