श्रावस्ती में गजब का खेल! अपनों को उजाड़ नेपालियों पर अधिकारी मेहरबान

श्रावस्ती में भारत-नेपाल सीमा पर एक गंभीर मामला सामने आया है. दशकों से रह रहे एक भारतीय परिवार को बेघर कर दिया गया, ताकि एक नेपाली नागरिक को अवैध कब्ज़ा दिलाया जा सके. आरोप है कि लेखपाल और कानूनगो ने भ्रष्टाचार कर यह खेल रचा है, जिससे देश की सुरक्षा भी दांव पर है.

श्रावस्ती में नेपाल सीमा पर भारतीय परिवार बेघर

श्रावस्ती में भारत-नेपाल सीमा पर एक ऐसा खेल खेला जा रहा है, जहां अपनों को उजाड़कर सरहद पार के लोगों को बसाया जा रहा है. भ्रष्टाचार के दीमक ने देश की सुरक्षा और मानवता दोनों को ताक पर रख दिया है. आरोप है कि लेखपाल और कानूनगो ने भ्रष्टाचार कर यह खेल रचा है. इससे परेसान होकर पीड़ित परिवार को अब कोर्ट का सहारा लेना पड़ा है.

आरोप है कि चंद रुपयों की खातिर लेखपाल और कानूनगो ने मिलकर 100 साल से रह रहे एक हिंदुस्तानी परिवार को बेघर कर दिया, ताकि नेपाल के एक नागरिक को वहां कब्जा दिलाया जा सके. मामला थाना मल्हीपुर के गांव ‘भरथा रोशन गढ़’ की है. यहां 100 सालों से भी ज्यादा समय से शमीम का परिवार रह रहा था, जिसके सिर की छत अब छीन ली गई है.

पूरे खेल के पीछे नेपाल का रहने वाला हेमराज यादव

पीड़ित शमीम का कसूर सिर्फ इतना है कि इनके पास अपनी कोई जमीन नहीं थी और ये सालों से बंजर जमीन पर पल्ली तानकर अपना आशियाना बनाए हुए थे. लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने इनसे सिर की छत भी छीन ली. आरोप है कि इस पूरे खेल के पीछे नेपाल का रहने वाला हेमराज यादव है. उसकी नजर शमीम के इस आशियाने पर थी.

पीड़ित ने रोते हुए बताया, ‘​साहब, हमारे बाप-दादा यहीं पैदा हुए. हमारे पास एक इंच भी जमीन नहीं है. हम सालों से यहां रह रहे थे. लेकिन नेपाल के हेमराज यादव ने लेखपाल-कानूनगो से मिलकर हमारा घर तुड़वा दिया. हम अब कहां जाएं?’ आज स्थिति यह है कि घर की बुजुर्ग महिलाएं और बच्चे रोने को मजबूर हैं. पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया है.

प्रशासन से हारकर अब सिविल कोर्ट पहुंचा परिवार

परिवार के एक बुजुर्ग महिला ने कहा, ‘हमारी तीन पीढ़ियां यहां गुजर गईं. आज बुढ़ापे में हमें रास्ते पर ला दिया. कोई हमारी सुनवाई नहीं कर रहा है.’ एक दूसरे पीड़ित ने बताया कि प्रशासन के पास गए तो दुत्कार दिया गया. नेपाल के आदमी को यहां बसाया जा रहा है और हम हिंदुस्तानियों को उजाड़ा जा रहा है. हमारे बच्चे भूखे प्यासे धूप में बैठे हैं.

आरोप है कि स्थानीय लेखपाल और कानूनगो ने कथित तौर पर एक मोटी रकम की खातिर देश के नागरिकों को ही उनके हक से बेदखल कर दिया. प्रशासन से उम्मीद हारकर अब पीड़ित परिवार को कोर्ट की शरण लेने पड़ा है. परिवार ने जमीन पर मालिकाना हक साबित करने और अवैध कब्जे के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है.

सरहद पार के लोग अपने और देश के नागरिक बेगाने?

अब सवाल यह उठता है कि क्या चंद रुपयों के लालच में सरकार के ये नुमाइंदे इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें सरहद पार के लोग अपने लगने लगे और अपने ही देश के नागरिक बेगाने? देखना होगा कि इस मामले में कोर्ट के दखल के बाद शासन-प्रशासन के इन भ्रष्ट अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और इस बेघर परिवार को कब तक न्याय मिलता है.

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