राकेश की हुई नाज! एक साल का प्यार, 3 महीने पहले कोर्ट में शादी; अब मंदिर में लिए सात फेरे

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक अंतरधार्मिक विवाह सुर्खियों में है. बिहार की नाज अंसारी ने हिंदू युवक राकेश गौतम से प्रेम विवाह के बाद कोर्ट मैरिज की थी. अब उन्होंने मंदिर में देवी मां को साक्षी मानकर सात फेरे लिए हैं. नाज ने हिंदू धर्म में आस्था जताते हुए कहा कि अब वह स्वतंत्र रूप से पूजा कर सकेंगी. यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है.

नाज ने राकेश संग लिए 7 फेरे

उत्तर प्रदेश के सीतापुर की एक घटना इस समय सोशल मीडिया में सुर्खियों में है. यह घटना अंतरधार्मिक विवाह की है. इसमें बिहार में आरा की रहने वाली मुस्लिम युवती ने तंबौर थाना क्षेत्र के मंदिर में देवी मां को साक्षी मान कर हिंदू युवक राकेश गौतम के साथ सात फेरे लिए हैं. इस विवाह को देखने के लिए मंदिर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी पहुंचे थे. इन्हीं लोगों द्वारा बनाया सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है.

जानकारी के अनुसार बिहार में आरा की रहने वाली नाज अंसारी पहले हरियाणा के पानीपत में रहती थी. जिस फैक्ट्री में वह काम करती थी, उसी में तंबौर का रहने वाला युवक राकेश गौतम भी काम करता था. काम के दौरान ही दोनों में प्यार हुआ और करीब तीन महीने पहले दोनों ने कोर्ट में शादी रचा ली. इस शादी के बाद दोनों साथ में ही रहते थे, लेकिन अचानक एक दिन नाज को लगा कि उसे हिंदू रीति रिवाज से शादी करनी चाहिए. इसके बाद दोनों ने बुधवार को मां काली के मंदिर में सात फेरे लिए हैं.

शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई शादी

इस शादी की सूचना पर बजरंग दल के जिला कार्याध्यक्ष सुनील भी मंदिर में पहुंचे. उनके साथ संगठन के अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आसपास के लोग भी मौजूद रहे. विधि विधान के साथ दोनों की शादी कराई गई. इस दौरान किसी तरह का कोई विवाद नहीं हुआ. मंदिर में हो रही इस अनोखी शादी की सूचना जैसे ही आसपास के गांवों तक पहुंची, मंदिर के बाहर लोगों की भी़ जुटनी शुरू हो गई. देखते ही देखते इस शादी के सैकड़ों लोग साक्षी बन गए.

नाज ने जताई देवी पर आस्था

इस शादी के बाद नाज अंसारी ने मां भगवती पर आस्था जताई. कहा कि बचपन से ही उसके मन में भगवान के प्रति भाव था, वह पूजा भी करना चाहती थी, लेकिन इस्लाम की वाध्यताओं की वजह से ऐसा नहीं कर सकी. अब वह हिंदू युवक से शादी कर पूर्ण रूप से हिंदू बन चुकी है. अब वह खुले मन से मां भगवती की पूजा कर सकती है. उधर, सोशल मीडिया पर लोग इसे दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति और प्रेम का मामला बात रहे हैं. वहीं कुछ लोग इसे सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था के तहत अलग नजरिए से देख रहे हैं.

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