गजब गाजियाबाद! 10 साल पहले ही अलॉट हो गईं अमीरों की कोठियां, अब तक क्यों अधूरे हैं गरीबों के आशियाने?

गाजियाबाद में जीडीए की एकीकृत टाउनशिप योजना गरीबों और अमीरों के बीच भेदभाव का प्रतीक बन गई है. 15 साल पहले लॉन्च हुई इस योजना के तहत अमीरों की कोठियां 10 साल पहले ही बनकर आवंटित हो गईं, लेकिन 3,469 ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास आज भी अधूरे हैं. अपने सपनों के घर के लिए रकम चुका चुके हजारों गरीब परिवार अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जबकि जीडीए केवल आश्वासन दे रहा है.

सांकेतिक तस्वीर

अमीरों और गरीबों के बीच भेदभाव देखना हो तो, कभी गाजियाबाद आ जाइए. यहां जीडीए ने 15 साल पहले इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना लांच की थी. इस योजना के तहत अमीरों के लिए कोठियां और विला आदि तो बनने ही थे, गरीबों के लिए 3,469 ईडब्ल्यूएस और 3,469 एलआईजी भवन भी बनाए जाने थे. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के निर्देशन में बिल्डरों ने समय से पहले ही ना केवल कोठी एवं विला का निर्माण कर दिया, बल्कि उनका आवंटन भी कर दिया. वहीं 10 साल बाद भी गरीबों के आशियाने अधूरे पड़े हैं.

यह स्थिति उस समय है जब लोगों ने जीडीए पर भरोसा कर अपने आशियाने की कीमत का 10 फीसदी लॉटरी से पहले ही जमा कर दिया. वहीं बाकी रकम का भुगतान बाद में तीन किश्तों में कर दिया. अब यह सभी घर खरीदार खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि जीडीए की देखरेख में बिल्डरों ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के नाम पर अपनी जेबें भर ली हैं. इस संबंध में आज भी पूछताछ करने पर जीडीए में केवल आश्वासन ही मिलता है.

क्या है योजना?

जानकारी के मुताबिक इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत सात बिल्डरों को चिन्हित किया गया था. इन बिल्डरों को कुल 3,469 ईडब्ल्यूएस और 3,469 एलआईजी भवन बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी. कायदे से ये सभी भवन साल 2016 तक बन जाने थे और अगले तीन महीने में इनका आवंटन हो जाना था. लेकिन 10 साल बाद भी अभी तक महज 1,709 ईडब्ल्यूएस और 1,552 एलआईजी भवनों का काम ही पूरा हो पाया है. यह स्थिति उस समय है जब इसी प्रोजेक्ट में बिल्डरों ने अमीरों की कोठियां बनाकर आवंटित भी कर दी है.

जीडीए वीसी ने दिया आश्वासन

यह मामला पिछले दिनों विधानसभा में भी उठा था. वहीं अब इस प्रोजेक्ट के संबंध में पूछे जाने पर जीडीए वीसी नंद किशोर कलाल ने फिर आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि बिल्डरों को ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास बनाने ही होंगे. इसके लिए उनसे परफॉर्मेंस गारंटी और टाइम-बाउंड चार्ट मांगा जाएगा. अनुपालन नही होने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी होगी. उधर, इस योजना में ठगा महसूस कर रहे घर खरीदारों का आरोप है कि अधिकारी इस मामले में कोई मदद नहीं कर रहे हैं.

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