पोषाहार मिला नहीं, कागजों में दिखा दिया वितरण; सोनभद्र में 124 बच्चों का निवाला हजम
सोनभद्र के एक गांव में पोषाहार गबन का गंभीर मामला सामने आया है. बच्चों को मिलने वाला तीन महीने का पोषाहार कथित तौर पर हजम कर लिया गया. जबकि कागजों में वितरण दिखा दिया गया है. शिकायतें खारिज होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा और ब्लॉक मुख्यालय पर चार घंटे तक हंगामा हुआ.
सोनभद्र के कोन ब्लॉक से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. खेमपुर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़े 124 बच्चों का तीन महीने का पोषाहार कथित तौर पर हजम कर लिया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि नवंबर से जनवरी तक बच्चों को मिलने वाला पोषाहार नहीं दिया गया.
आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों ने मामले को दबाने की कोशिश की. आईजीआरएस पर की गई शिकायत को भी विभागीय स्तर पर खारिज कर दिया गया, जिससे नाराज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और ब्लॉक मुख्यालय पर जमकर हंगामा हुआ. मामले को लेकर ग्रामीण प्रधान के साथ कोन ब्लॉक पहुंचे और बीडीओ को ज्ञापन सौंपा है.
पोषाहार मिला नहीं, कागजों में दिखा दिया वितरण
खेमपुर गांव में बच्चों के हक पर डाका डालने के आरोप ने पूरे इलाके में आक्रोश की आग भड़का दी है. ग्रामीणों का कहना है कि 124 बच्चों को तीन महीने से पोषाहार नहीं मिला, जबकि कागजों में वितरण दिखाया जा रहा है. आरोप है कि वितरण रजिस्टर में भी छेड़छाड़ की गई और पोषाहार को बाजार में बेचने तक की बात सामने आई है.
मामले को लेकर 35 से ज्यादा ग्रामीण प्रधान सरफराज अली के साथ बीडीओ जितेंद्र नाथ दूबे को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और नई कार्यकत्री की तैनाती की मांग की. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर सुपरवाइजर ने उन्हें धमकाया और अभद्र व्यवहार किया, जिससे मामला और भड़क गया है.
बच्चों के हक का पोषाहार किसकी जेब में समा गया?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर गांव भेजी, लेकिन वहां भी ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. जैसे ही टीम गांव पहुंची, माहौल गर्म हो गया और करीब चार घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही. अधिकारियों को हालात शांत होने का इंतजार करना पड़ा, तब जाकर किसी तरह ग्रामीणों को समझा-बुझाकर स्थिति नियंत्रित की गई.
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्ट्रेट पहुंचकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे. फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि बच्चों के हक का पोषाहार आखिर किसकी जेब में समा गया और जिम्मेदारों पर कब तक सख्त कार्रवाई होगी.
रिपोर्ट- मोहित मिश्रा, टीवी9
