प्रीपेड मीटर सर्विस में लापरवाही पर नियामक आयोग सख्त, UPPCL पर लगाया 7.18 लाख का जुर्माना
उत्तर प्रदेश नियामक आयोग (UPERC) ने UPPCL पर ₹7.18 लाख का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज के दो घंटे के भीतर बिजली बहाल न करने की लापरवाही के लिए की गई. साथ ही भविष्य में ऐसी चूक रोकने के लिए 'रूट कॉज़ एनालिसिस' का भी निर्देश दिया गया है.
उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अब बिजली विभाग के लिए मुसीबत बनते जा रहा है. लाखों मीटर प्रीपेड में बदलने और देरी से बिजली मिलने पर उपभोक्ताओं में रोष है. वहीं, उपभोक्ता परिषद की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए यूपी पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के चेयरपर्सन अरविंद कुमार और मेंबर संजय कुमार सिंह की दो मेंबर वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया है. यह कार्रवाई स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज के दो घंटे के भीतर बिजली बहाल न करने की लापरवाही के लिए की है. साथ ही कमीशन ने UPPCL को निर्देश दिया कि जुर्माने की रकम 15 दिनों के अंदर जमा की जानी चाहिए.
उपभोक्ता परिषद ने लगाया था उल्लंघन का आरोप
दरअसल, इस साल मार्च के महीने में, बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की सहमति लिए बिना लाखों स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदल दिया था. लेकिन जैसे ही बैलेंस नेगेटिव हुआ, प्रदेश भर में लगभग 5 लाख घरों की बिजली काट दी गई. हालांकि, कंज्यूमर्स के मीटर रिचार्ज करने के बाद भी घरों में बिजली ठीक होने में 15 दिनों तक की देरी हुई.
इस घटना से पूरे राज्य में बहुत गुस्सा और हंगामा हुआ. बाद में शासन के आदेश के बाद UPPCL ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना बंद कर दी. साथ ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर रिचार्ज में भी ढील दी थी. लेकिन इस बीच उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने एक पिटीशन फाइल की, जिसमें UPERC रेगुलेशंस के उल्लंघन का आरोप लगाया गया.
रिचार्ज के दो घंटे के अंदर बिजली क्यों नहीं आई?
वहीं, मामले की सुनवाई में नियामक आयोग ने पाया कि बिजली विभाग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम के तहत कंज्यूमर सर्विसेज़ में गंभीर लापरवाही दिखाई है. रेगुलेशंस के अनुसार, रिचार्ज के दो घंटे के अंदर बिजली वापस आ जानी चाहिए, लेकिन बिजली कंपनियां इस स्टैंडर्ड को पूरा करने में फेल रहीं. इसीलिए UPPCL पर 7.18 लाख का फाइन और जवाब मांगा गया है.
UPPCL पर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 के सेक्शन 142 और 57 के तहत पेनल्टी लगाई है. इसमें हर उल्लंघन पर ₹1 लाख और देरी के हर दिन के ₹6,000 का कैलकुलेशन किया गया, जिससे कुल ₹7.18 लाख हो गए. कमीशन ने कहा कि इस स्थिति में ‘रूट कॉज़ एनालिसिस’ की ज़रूरत है ताकि यह पक्का हो सके कि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो.
