कार्यकाल बढ़ेगा या नियुक्त होंगे एडमिनिस्ट्रेटर… 26 मई के बाद कैसे चलेगी गांव की सरकार?

यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. 26 मई को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने को है, पर इससे पहले चुनाव की संभावना बिल्कुल भी नहीं हैं. सभी राजनीतिक दलों ने भी 2027 विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित कर लिया हैं. इसी प्रकार अभी आरक्षण और वोटर लिस्ट जैसे मुद्दे अधूरे हैं. ऐसे में अब सरकार के पास कार्यकाल विस्तार या प्रशासक नियुक्त करने का विकल्प है.

सांकेतिक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. 26 मई को पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल खत्म हो रहा है. जबकि दूसरी ओर, हाल फिलहाल में चुनाव कराए जाने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गांव की नई सरकार कब तक बनेगी. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संभावना यह भी है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकेंगे.

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक चाहे सत्तारुढ़ बीजेपी हो या अन्य विपक्षी दल, अब 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक दल पंचायत चुनाव में उलझने से बचने की भरसक कोशिश कर रहे हैं. वहीं, अभी तक पंचायत चुनाव के लिए जरूरी तैयारियां भी पूरी नहीं हो पायी हैं. पंचायत चुनाव के लिए वोटर लिस्ट का काम भी अभी फाइनल नहीं हुआ है. माना जा रहा है कि फाइनल वोटर लिस्ट 15 अप्रैल कोआएगी.

आरक्षण की भी है अड़चन

पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट भले ही 15 अप्रैल को आ जाए, लेकिन सबसे बड़ी अड़चन समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन और आरक्षण प्रक्रिया के रूप में सामने है. हाईकोर्ट के निर्देश के तहत अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग का गठन नहीं हो सका है. आयोग गठित होने के बाद ही आरक्षण का फार्मूला जारी किया जा सकेगा. इस संबंध में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर पहले समय पर चुनाव के दावे तो कर रहे थे, लेकिन अब वो भी गोल-गोल बयान देने लगे हैं.

यही एक मात्र विकल्प

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के पास अब एक ही विकल्प बचा है. वो विकल्प यह है कि पंचायतों के मौजूदा कार्यकाल को ही एक्सटेंशन दिया जाए. ऐसा होने से प्रधानों का कार्यकाल बढ़ जाएगा. यदि इसमें कोई अड़चन आती है तो फिर पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करना होगा. माना जा रहा है कि अब अगले साल विधानसभा चुनाव होने के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जा सकेंगे.

राजनीतिक दलों ने साधी चुप्पी

मौजूदा परिस्थितियों में सरकार पर समय से पंचायत चुनाव कराने के लिए कोई दबाव बनता भी नजर नहीं आ रहा. सपा, बसपा समेत सभी विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं. माना जा रहा है कि इनमें से कोई भी राजनीतिक दल अभी पंचायत चुनाव में उतरने की स्थिति में नहीं है. हालांकि, समय पर चुनाव कराने के लिए हाईकोर्ट में एक अर्जी जरूर दाखिल हुई है. ऐसे में अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर है.

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