आलोक के साथ नहीं रहेंगी ADM ज्योति मौर्या, बोलीं- 2 महीने में हो जाएगा तलाक

पति आलोक के साथ समझौता होने की खबर आने के बाद अब एडीएम ज्योति मौर्या का पक्ष सामने आया है. उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका तलाक लास्ट स्टेज पर है. दो महीने के अंदर डायवोर्स हो जाएगा. आलोक के साथ समझौता मुमकिन ही नहीं है.

PCS ऑफिसर ज्योति मौर्या और आलोक

यूपी का चर्चित ज्योति-आलोक मौर्या विवाद अब एक बार फिर से सुर्खियों में है. खबर आई थी कि PCS अधिकारी ज्योति मौर्या और उनके पति आलोक मौर्या के बीच चल रहा विवाद खत्म हो गया है. तकरीबन 3 साल तक एक दूसरे पर तमाम आरोप लगाने के बाद दोनों ने एक साथ रहने का फैसला किया है. लेकिन, पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्या ने इसे सिरे से खारिज कर कर दिया. एक मीडिया पोर्टल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी बिल्कुल भी संभावना नहीं है. उन्हें नहीं पता कि यह खबर कहां से फैल रही है.

सूत्रों के मुताबिक ज्योति मौर्या को हाल ही में प्रमोशन हुआ है. उनकी नई पोस्टिंग गाजियाबाद में एडीएम के तौर पर हुई है. उन्होंने साफतौर पर कह दिया है कि उनका तलाक लास्ट स्टेज पर है. दो महीने के अंदर डायवोर्स हो जाएगा. आलोक के साथ समझौता मुमकिन ही नहीं है. अब तो तलाक होने के करीब है. हम अलग हो चुके हैं. ये खबर कैसे फैल रही है, आलोक कौन सा पीआर करना चाह रहे हैं, उन्हें बिल्कुल नहीं पता.

2010 में शादी, 2015 में पीसीएस में ज्योति का हुआ चयन

साल 2010 में आलोक और ज्योति की शादी हुई थी. दोनों के बीच भरपूर प्यार था. लेकिन साल 2015 में ज्योति मौर्या का पीसीएस में चयन हो गया. उन्हें एसडीएम के तौर पर पोस्टिंग मिली. वहीं, आलोक पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे. इस समय तक सबकुछ सही था. लेकिन एसडीएम बनने के बाद ज्योति का अपने पति आलोक के साथ रिश्ता बिगड़ने लगा. दोनों के बीच दूरियां भी बढ़ने लगी.

पति आलोक ने लगा दिए थे ज्योति पर ये गंभीर आरोप

दोनों के बीच दूरियां इतनी बढ़ी कि आलोक ने साल 2023 में ज्योति पर नजर अंदाज करने, भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने और एक अन्य अधिकारी के संबंध होने का आरोप लगा डाला. इन आरोपों की जांच के लिए उन्होंने हाई लेवल जांच की मांग की. आलोक का कहना था कि उन्होंने अपनी पत्नी की पढ़ाई और तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पत्नी को एसडीएम बनाने के पीछे पूरा हाथ उनका था. ऐसे में यह मामला सुर्खियों में आ गया.

शासन ने प्रशासनिक स्तर पर जांच का आदेश दिया था

मामला बढ़ता देख शासन ने इस मामले की प्रशासनिक स्तर पर जांच के आदेश दे दिए थे. फिर तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई. दोनों पक्ष से सबूत मांगे गए. लेकिन आलोक ने अपने आरोपों को साबित करने की बजाय शिकायत वापस ले लिया था. इसके बाद कमेटी की तरफ से भी मामले को समाप्त करने का रिपोर्ट फाइल कर दिया गया था. इस बीच कई प्रतियोगी परीक्षाओं को देते हुए नजर आए हैं. कहा जा रहा है, वह अपने करियर को नए तरीके से संवारना चाह रहे हैं. बताया यह भी जा रहा रहा है कि वह यूपी पीसीएस में इंटरव्यू तक भी पहुंचे थे. लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं था.

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