अप्रैल में नहीं तो क्या सितंबर-अक्टूबर में होंगे UP पंचायत चुनाव? जानें क्यों कहा जा रहा ऐसा

यूपी में होने जा रहे पंचायत चुनावों में देरी हो सकती है. राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से अंतिम मतदाता सूची जारी करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 28 मार्च कर दी गई है. इससे प्रचार और मतदान की तारीखें भी आगे खिसक सकती हैं. इसके अलावा ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग कमीशन का गठन भी नहीं हो पाया है. ऐसे में माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव सिंतबर -अक्तूबर तक टल सकते हैं.

यूपी पंचायत इलेक्शन

यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी हो सकती है. दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख बढ़ा दी है अब अंतिम वोटर लिस्ट 28 मार्च 2026 को जारी की जाएगी. यह पहले की डेडलाइन से 50 दिन देरी से जारी होंगी. इससे पंचायत चुनाव टलने की संभावना और मजबूत हो गई है. साथ ही अब तक प्रदेश में ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग कमीशन का भी गठन नहीं हो पाया है.

इस वजह से भी पंचायत चुनाव खिसकने की आशंका

प्रदेश में ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग कमीशन का भी गठन होना है ताकि पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी और सही तरीके से हो सके. आयोग गठित होने के बाद भी जिलों में ओबीसी आबादी का सर्वे करने और रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम 3 महीने और अधिकतम 6 महीने लग सकते हैं. अप्रैल-मई का चुनाव शेड्यूल प्रभावित हो सकता है. ऐसे में कई लोग अंदेशा जता रहे हैं पंचायत चुनाव सितंबर-अक्टूबर में हो सकते हैं.

क्यों अंतिम मतादाता सूची लाने में हो रही देरी

राज्य निर्वाचन आयुक्त पंचायत और स्थानीय निकाय राज प्रताप सिंह ने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान 2025-26 के तहत दावे-आपत्तियों के निस्तारण और अन्य प्रक्रियाओं में समय लग रहा है. उन्होंने कहा कि दावे-आपत्तियों की संख्या लाखों में है. ऐसे में हस्तलिखित पांडुलिपियां तैयार करने, डुप्लीकेट मतदाताओं के सत्यापन और दस्तावेजी कार्य में अतिरिक्त समय की जरूरत पड़ रही है. इसलिए अंतिम मतदाता सूची अब 28 मार्च को किया जाएगा.

ड्राफ्ट लिस्ट में 40.19 लाख नए मतदाता जुड़े

आयोग ने 18 दिसंबर 2025 को प्रारंभिक पुनरीक्षण सूची जारी की थी. इसमें पिछले चुनाव की तुलना में 40.19 लाख नए मतदाता जुड़े थे. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित हुई. दावे और आपत्तियां 6 फरवरी तक मांगी गई थीं. ज्यादा संख्या में मिले दावों के चलते राज्य निर्वाचन आयोग को समयसीमा बढ़ानी पड़ी. पहले अंतिम सूची 6 फरवरी को जारी होने वाली थी. लेकिन अब यह 28 मार्च तक टल गई है.

28 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित होगी

21 फरवरी से 16 मार्च तक पूरक सूचियों का कंप्यूटरीकरण, मूल सूची में समाहित करना और मतदान केंद्रों का निर्धारण होगा. फिर 17 से 27 मार्च तक मतदान केंद्रों का क्रमांकन, मतदेय स्थलों की मैपिंग, मतदाता क्रमांकन और स्टेट वोटर नंबर का आवंटन जैसे काम पूरे किए जाएंगे. इसके बाद ही 28 मार्च को अंतिम सूची प्रकाशित होगी. अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी कुछ आपत्तियां आएंगी. इन्हें निपटाने में एक महीने और लग सकते हैं. तब जाकर फिर पंचायत चुनाव के बारे में सोचा जा सकता है.

आगे खिसक सकता है चुनाव

मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी से नामांकन, प्रचार और मतदान की तारीखें भी आगे खिसक सकती हैं, जिससे चुनाव अप्रैल या मई तक टल सकता है. राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा रही हैं, ताकि कोई योग्य मतदाता छूट न जाए. ऐसे में यह चर्चा बेहद तेज हो गई है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव सितंबर और अक्टूबर तक खिसक सकता है.