जातियों को लड़ाने की साजिश… BHU के एग्जाम में पूछे प्रश्न पर शंकराचार्य के आरोप, अखिलेश ने भी उठाए सवाल
बीएचयू एमए परीक्षा में "क्या ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?" प्रश्न पर राजनीतिक बवाल मचा है. अखिलेश यादव और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे बीजेपी की जातियों को लड़ाने की साजिश बताया. हालांकि, बीएचयू ने आपत्ति खारिज कर कहा कि जिन्हें ब्राह्मणवाद का अर्थ नहीं पता, वे ही सवाल उठा रहे हैं.
BHU में एमए(हिस्ट्री )फोर्थ सेमेस्टर एग्जाम में पूछे गए एक सवाल पर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है. इस सवाल पर एक तरफ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की नीयत पर सवाल उठाया है, वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है. शंकराचार्य ने साफ तौर पर कहा है कि केंद्र सरकार की यह साजिश है. इसका उद्देश्य जातियों को आपस में लड़ाना है. वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि यह सवाल ही टेढ़ा मेढ़ा है. इसके पीछे बीजेपी की सोची समझी साजिश है.
बता दें कि बीएचयू में इस समय फोर्थ सेमेस्टर के एग्जाम चल रहे हैं. इसी एग्जाम के दौरान एमए प्राचीन इतिहास के प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया है कि ‘क्या ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली’? इस सवाल पर पहले अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने आपत्ति की, उसके बाद तमाम राजनीतिक दल भी कूद पड़े हैं. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस सवाल को अपने रोजाना के प्रेस कांफ्रेंस में भी शामिल किया.
बीएचयू ने खारिज की आपत्ति
यह अलग बात है कि बीएचयू ने इस सवाल पर आपत्ति उठाने वालों पर ही आपत्ति उठाई है. बीएचयू में प्राचीन इतिहास विभाग की सीनियर प्रोफेसर और सोशल साइंस फैकल्टी की पूर्व डीन बिन्दा परांजपे ने कहा कि इस सवाल पर आपत्ति तो उठनी ही नहीं चाहिए. दरअसल इसपर वही लोग आपत्ति उठा रहे हैं, जिन्हें न तो ब्राह्मण का अर्थ मालूम है और ना ही ब्राह्मणवाद का. उन्होंने तो इस सवाल पर सवाल उठाने वालों की मानसिकता पर ही सवाल उठा दिया.
अखिलेश यादव ने बीजेपी को घेरा
इस सवाल पर अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर बीजेपी को घेरने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जहां ज्यादा पेपर आउट हो रहे हैं, वहीं पर बीजेपी शिक्षा का केंद्र बना रही है. उन्होंने कहा कि मालवीय जी के बनाए बीएचयू में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं, यह पूरी तरह बीजेपी की सोची समझी साजिश है. उधर, गोरक्षा यात्रा पर निकले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे केंद्र सरकार की साजिश बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जातियों को आपस में लड़ाना चाहती है.
