नाग पंचमी पर काशी में दिखा ‘अखाड़ा परंपरा’, जर्मनी के सैंडी ने भी घुमाई गदा, हनुमान जी के हैं भक्त
वाराणसी में नाग पंचमी पर प्राचीन अखाड़ा परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला. नगवा स्थित हनुमान मंदिर में देशी-विदेशी पहलवानों ने जोड़ी, गदा और नाल घुमाकर शक्ति प्रदर्शन किया. जर्मनी के पहलवान सैंडी ने भी हनुमान भक्ति दिखाते हुए कुश्ती के दांव-पेंच आजमाए.
काशी की प्राचीन अखाड़ा परंपरा और नाग पंचमी के पर्व का अनूठा संगम सोमवार को नगवा स्थित हनुमान मंदिर और रविदास पार्क के समीप देखने को मिला. नाग पंचमी के पावन अवसर पर यहां पारंपरिक जोड़ी, गदा और नाल घुमाने के साथ भारी वजन उठाने तथा शक्ति प्रदर्शन की प्रतियोगिता आयोजित की गई. कार्यक्रम में स्थानीय पहलवानों के साथ दूर-दराज से पहुंचे पहलवानों ने अपनी शारीरिक क्षमता और पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन किया.
इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘बजरंगबली की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा. नाग पंचमी के दिन यहां पहलवान अपनी ताकत और कला का प्रदर्शन करने पहुंचते हैं. यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. इस बार भी पहलवानों ने एक के बाद एक करतब दिखाकर लोगों को रोमांचित कर दिया.
जर्मनी से आए पहलवान सैंडी रहे खास आकर्षण
आयोजन में शामिल रवि यादव ने बताया कि उन्होंने यह परंपरा अपने पिता से सीखी है. उनके दादा भी इस आयोजन को करते थे और उनके पिता ने भी वर्षों तक नाग पंचमी के मौके पर यहां शक्ति प्रदर्शन किया. उन्होंने बताया कि उनके पिता उन चुनिंदा पहलवानों में शामिल थे जो कांटों वाली जोड़ी घुमाने में माहिर थे.
इस आयोजन का सबसे खास आकर्षण जर्मनी से आए पहलवान सैंडी रहे. उन्होंने अखाड़े में गदा घुमाकर भारतीय पारंपरिक युद्धकला को करीब से महसूस किया. विदेशी पहलवान को पारंपरिक अंदाज में गदा घुमाते देखकर वहां मौजूद लोग भी उत्साहित नजर आए. सैंडी ने बताया कि वो भी हनुमान जी एक भक्त हैं और उससे जुड़ा महसूस करते हैं.
हनुमान जी के भक्त हैं जर्मनी के पहलवान सैंडी
सैंडी ने बताया कि नाग पंचमी बेहद खूबसूरत उत्सव है. लोग शक्ति, अखाड़ा, पहलवान और कुश्ती संस्कृति का जश्न मनाने के लिए हर जगह से आते हैं. उन्होंने बताया कि वह आधुनिक स्टील के उपकरणों से इस तरह की तकनीक सीख चुके हैं, लेकिन भारत आकर उन्होंने बांस, पत्थर और सीमेंट से बने पारंपरिक उपकरणों के इस्तेमाल को करीब से समझा.
जर्मन पहलवान सैंडी ने खुद को हनुमान जी का भक्त बताया. उन्होंने कहा कि अखाड़ों में जहां भी जाते हैं, वहां किसी न किसी रूप में हनुमान जी से जुड़ा महसूस करते हैं. क्योंकि अखाड़ों में आप जहां भी जाएंगे, हनुमान जी की पूजा और उनसे जुड़ी कोई न कोई बात ज़रूर होती है. लोग उनके बारे में बातें करते हैं. वे ताकत और भक्ति का प्रतीक हैं.
प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे
नाग पंचमी के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर काशी की पारंपरिक अखाड़ा संस्कृति की झलक दिखाई. अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेंच और पारंपरिक युद्धकला का प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे. इस परंपरा से विदेशी पहलवान भी जुड़ रहे हैं, जिससे भारतीय कुश्ती और पारंपरिक युद्धकला दुनिया तक पहुंच रही है.
