‘रोको, टोको और ठोको’, ये होगा अविमुक्तेश्वरानंद की चतुरंगिणी सेना का स्लोगन, खुद होंगे सुप्रीम कमांडर
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में 'चतुरंगिणी सेना' बनाने का ऐलान किया है. यह 27 कमांडरों के नेतृत्व में कार्य करेगी, यह 2.18 लाख गौ सैनिकों की फौज होगा. शंकराचार्य खुद इसके सुप्रीम कमांडर होंगे. उन्होंने अगले साल मौनी अमावस्या तक चतुरंगिणी सेना के गठन का आदेश दिया है.
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फेंस की. इस दौरान उन्होंने ‘चतुरंगिणी सेना’ के गठन की घोषणा की. इसका मुख्य उद्देश्य गौ, गंगा और मंदिरों की रक्षा के लिए सनातन धर्म की एक विशाल सेना तैयार करना है. वाराणसी के विद्या मठ में पंचमी तिथि को अभिजीत मुहूर्त में इस सेना का गठन हुआ.
चतुरंगिणी सेना कुल 27 कमांडरों के नेतृत्व में कार्य करेगी. शंकराचार्य की सेना का स्लोगन ‘टोको, रोको और ठोंको’ रखा गया है. शंकराचार्य ने मीडिया के सामने इसे को समझाते हुए कहा कि सनातन के रक्षार्थ गऊ, गंगा और मंदिरों की रक्षा के लिए पहले टोकेंगे फिर रोकेंगे और नहीं मानने पर ठोंकेंगे. उन्होंने साफ किया कि ठोंकने का तात्पर्य मुकदमा ठोंकने से है.
2,18,700 सैनिक जुटाएंगे, होंगे सुप्रीम कमांडर
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने 27 कमांडरों को अगले साल मौनी अमावस्या तक चतुरंगिणी सेना के गठन का आदेश दिया है. चतुरंगिणी सेना एक औक्षहिनी होगी. जिसका लक्ष्य अगले मौनी अमावस्या तक 2,18,700 सैनिक जुटाना है. चतुरंगिणी सेना का हेड क्वार्टर वाराणसी का विद्या मठ होगा और अविमुक्तेश्वरानंद खुद इस विशाल सेना के सुप्रीम कमांडर होंगे.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही चतुरंगिणी सेना की नीति का निर्धारण करेंगे. इनके नीचे मेन बॉडी होगी जो संगठन और नीति के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे. शंकराचार्य सर्वाध्यक्ष (पुरुष ), शंकराचार्य सह सर्वाध्यक्ष (महिला) और शंकराचार्य संयुक्त सर्वाध्यक्ष (तृतीय लिंग) होंगे. वहीं, तत्व जिज्ञासु जी, साध्वी जगदम्बा और गौरी मंगला क्रमशः इन पदों पर आसीन हैं.
इस संगठन को चार मेन भागों में बांटा गया है
- मनबल- ये बौद्धिक लोगों का संगठन होगा. इसमें विद्वान, अधिवक्ता, मीडिया और पुरोहित वर्ग से लोग होंगे. महामण्डलेश्वर अमरेश्वरानंद जी इसके प्रमुख होंगे.
- तनबल- ये शारीरिक रूप से इस सेना को अपनी सेवाएं देंगे. इनको मल्ल, तलवार, लाठी, परशु और अग्नेयास्त्र का प्रशिक्षण दिया जाएगा. सभी प्रशिक्षण कानून के दायरे में होंगे. ब्रह्मचारी शंभू प्रेमानंद इसके प्रमुख होंगे.
- धनबल- संगठन चलाने हेतु धनबल का प्रबंधन करने वाली ये शाखा होगी. प्रकट गुप्त,भूमि, वस्तु एवं भवन के जरिए इस शाखा से लोग जुड़ेंगे. ब्रह्मचारी परमात्मानंद इसके प्रमुख होंगे.
- जनबल- सेना की इस शाखा से लोगों को सर्वकालिक, वार्षिक, मासिक, साप्ताहिक और दैनिक आधार पर जोड़ा जाएगा. महामंडलेश्वर शिवम जी महाराज इसके प्रमुख होंगे.
सेना का ड्रेस कोड पीला वस्त्र और हाथ में परशु
वहीं, चतुरंगिणी सेना के चार अंग के अलावे 20 विभाग होंगे. सेना के सदस्यों का ड्रेस कोड पीला वस्त्र और हाथ में परशु होगा. शंकराचार्य की सेना की हायरेरकी इस प्रकार होगी. पत्तिपाल, सेनामुखपति, गुल्मपति, गणपाल, वाहिनीपति, पृतनापति, चमुपति, अनीकिनीपति और महासेनापति होंगे. इन पदों पर किन लोगों की नियुक्ति होगी वो अमावस्या तक तय हो जाएगा.
