PM के संसदीय क्षेत्र में बदले चुनावी समीकरण, 3 लाख से अधिक वोट कटे, BJP को बड़ी चुनौती
वाराणसी में एसआईआर की अंतिम सूची ने राजनैतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. पीएम के संसदीय क्षेत्र में 3 लाख से अधिक वोट कटे, जिससे बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ी हैं. वाराणसी के सभी पांच विधानसभा सीटों पर 2022 में हुई जीत हार के मुलाबले ज़्यादा वोट कटे हैं.
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है. वाराणसी में SIR के बाद राजनैतिक गलियारों में हलचल बढ़ा गई है. पीएम के संसदीय क्षेत्र में 3 लाख से अधिक वोट कटे हैं. वाराणसी के पांचों विधानसभा सीटों पर 2022 में हुई जीत हार के मुलाबले ज़्यादा वोट कटे हैं, जो बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है.
वाराणसी में 27 अक्टूबर 2025 को एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के समय 20,16,944 वोटर थे. जो कि 10 अप्रैल 2026 को एसआईआर की फाइनल लिस्ट आने के बाद 16,95,720 वोटर रह गए. यानी वोटर लिस्ट से कुल 3,21,224 नाम कम हो गए हैं. अंतिम मतदाता सूची में शहर उत्तरी और दक्षिणी विधानसभा सीट पर सबसे ज़्यादा वोट कटे हैं.
SIR ने मौजूदा राजनैतिक स्थिति को दिलचस्प बना दिया
वाराणसी संसदीय क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीट हैं, इसमें से चार पर बीजेपी और एक पर NDA के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) का कब्जा है. अब इन पांचों सीट पर 2022 में हुई जीत हार के मुलाबले ज़्यादा वोट कटे हैं, जो बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है. हालांकि, वोट किस पार्टी के घटे हैं ये मतदाता सूचि के अंतिम प्रकाशन के बाद हो तय हो पाएगा.
वरिष्ठ पत्रकार और काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्रा कहते हैं कि ‘अभी कोई ये कहने की स्थिति में नही है कि किसके वोटर कटे हैं जबतक कि मतदाताओं की अंतिम सूचि सामने नहीं आ जाती. लेकिन इतना तो तय है कि SIR ने बनारस की मौजूदा राजनैतिक स्थिति को दिलचस्प बना दिया है, अब राजनैतिक दलों को ज़्यादा मेहनत करने की जरूरत पड़ेगी.’
वाराणसी के पांचों विधानसभा सीटों पर बदले समीकरण
वाराणसी के कैंट विधानसभा सीट पर सबसे ज़्यादा वोटरों के नाम कटे हैं. कैंट में 93,714 वोटर कटे हैं. जबकि 2022 में यहां जीत का अंतर 86,844 वोटों का था. मतलब की जीत हार के अंतर से ज़्यादा वोट कटे हैं. सबसे ज्यादा उठा पटक शहर दक्षिणी में देखने को मिली है. यहां 53,015 वोट कटे हैं जबकि 2022 में जीत हार का अंतर महज 10,722 वोटों का था.
इसका मतलब हुआ कि शहर दक्षिणी में सीट पर जीत हार के अंतर की तुलना में करीब करीब पांच गुणा ज़्यादा वोट कटे हैं. वहीं, शहर उत्तरी में 83,645 वोट कटे हैं जबकि 2022 में यहां जीत हार का अंतर 40,776 वोटों का था. इसका मतलब हुआ की जीत हार की तुलना में दो गुणा वोट कट गए हैं. यही स्थिति वाराणसी के दोनों ग्रामीण विधानसभा सीटों की भी है.
रोहनिया विधानसभा सीट में 55,353 वोट कटे हैं जबकि 2022 में जीत हार का अंतर 46,472 वोटों का था. और सेवापुरी में 35,496 वोट कटे हैं जबकि यहां पिछले चुनाव में जीत हार का अंतर 22,531 वोटों का था. चुनाव आयोग का मानना है कि इससे मतदाता सूची सटीक होगी, लेकिन यह भी तय है कि इससे अब सभी दलों को बहुत मेहनत करनी होगी.