वाराणसी में गर्ल्स हॉस्टल की जमीन पर होटल बनाने पर विवाद, जानिए क्या है पूरा मामला
वाराणसी के कमच्छा स्थित डेढ़ सौ साल पुराने थियोसोफिकल सोसाइटी की एक प्रॉपर्टी को दयाल ग्रुप को लीज पर देने का मामला गरमा गया है. यह प्रॉपर्टी थियोसोफिकल सोसाइटी इंडियन सेक्शन की है, जो ऐतिहासिक महत्व की है और बीएचयू से जुड़े पुराने छात्रों और बौद्धिक वर्ग में इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता है. काशी के लोगों ने कहा, 'बीएचयू की स्थापना में एनी बेसेंट की महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी ही विरासत को खत्म किया जा रहा है.'
वाराणसी के कमच्छा स्थित डेढ़ सौ साल पुराने थियोसोफिकल सोसाइटी की एक प्रॉपर्टी को दयाल ग्रुप को लीज पर दिया जा रहा है. इस खबर ने वाराणसी के बौद्धिक वर्ग में हलचल मचा दी है. बीएचयू से जुड़े पुराने छात्र इसका विरोध कर रहे हैं. यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक और बीएचयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने ये मुद्दा उठाया और सरकार से जवाब मांगा है. आइए जानते हैं कि पूरा विवाद क्या है-
दरअसल, वाराणसी के रथयात्रा चौराहे के पास थियोसोफिकल सोसाइटी की कई बिस्वा जमीन है. इसी में 16 बिस्वा जमीन को सोसाइटी ने दयाल ग्रुप को 30 साल के लिए लीज पर दे दिया है. यहां दयाल ग्रुप की ओर से 65 कमरों वाला थ्री स्टार होटल पिछले नौ महीनों से बन रहा है. अभी निर्माण कार्य पूरा होने में साल भर और लगेगा. खुद को इस होटल के केयर टेकर बताने वाले जुगनू सिंह ने बताया कि ये निर्माण सोसाइटी और दयाल ग्रुप के बीच हुए समझौते के बाद हो रहा है. सोसाइटी की जमीन हमने लीज पर ली है और वीडीए द्वारा अप्रूवल मिलने के बाद ही हमने निर्माण कार्य शुरू कराया.
एनी बेसेंट से प्रेरित होकर स्थापना
बसंत महिला कॉलेज की जमीन पर बन रहे होटल दयाल बनारस को लेकर विवाद शुरू हो गया है. वसंत कन्या महाविद्यालय, BHU से मान्यता प्राप्त है और इसे VKM भी कहा जाता है. इसकी स्थापना 1954 में रोहित मेहता ने डॉ. एनी बेसेंट से प्रेरित होकर की थी. यह कॉलेज एनी बेसेंट फेलोशिप के तहत थियोसोफिकल परिसर में स्थित है. बताया जा रहा है कि जिस जमीन को होटल को लीज पर दिया गया था, उस पर लड़कियों का हॉस्टल बनना था.
काशी के बौद्धिक समाज का विरोध
इस मामले में BHU छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री और सामाजिक न्याय मंच के संयोजक डॉ सूबेदार सिंह ने भी इसे काशी की धरोहर से खिलवाड़ करने और सरकार पर एनी बेसेंट के तपोभूमि को व्यवसायिक हितों पर तरजीह देने का आरोप लगाया है. सूबेदार सिंह ने कहा कि काशी में शिक्षा और आध्यात्म की अलख जगाने के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया उनकी संस्था को एक होटल कारोबारी को दिया जा रहा है.
काशी में बड़ा जन आंदोलन की तैयारी
काशी के लोगों का कहना है कि संस्था की 26 बिस्वा जमीन एक होटल वाले को 30 साल की लीज पर देकर आजादी की लड़ाई की नेत्री और बीएचयू जैसे विश्वविद्यालय की स्थापना की नींव बनी एनी बेसेंट जी के आदर्शो को धूल धुसरित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है. इसके ख़िलाफ काशी में एक बड़ा जन-आंदोलन होने जा रहा है. अधिवक्ता शम्मी कुमार ने भी थियोसोफिकल सोसाइटी के प्रॉपर्टी को होटल कारोबारी को दिए जाने का विरोध किया है.
21 फरवरी को होटल निर्माण का होगा विरोध
डॉक्टर शम्मी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी प्रॉपर्टी की अंतिम कॉस्टोडियन सरकार होती है. इसलिए ये कह देना कि ये कहना ठीक नही है कि ये सोसाइटी और होटल व्यवसायी के बीच का मामला है. कल को होटल में पब खुलेगा और बगल में गर्ल्स हॉस्टल है तो बताइए कि क्या ये उचित है? बीएचयू के पुराने छात्र और समाजवादी नेता कुंवर सुरेश सिंह ने कहा कि इस मामले में 21 फरवरी को होटल निर्माण के ख़िलाफ एक बड़ा धरना होगा, जिसमें वाराणसी के बौद्धिक लोग और बीएचयू के पूर्व छात्र शामिल होंगे. जरूरत पड़ी तो इसके ख़िलाफ हम हाईकोर्ट जाएंगे.
सोसाइटी की ओर से क्या जवाब दिया गया?
इस मामले में सोसाइटी के सेक्रेटरी शशिनंदन राजदर ने बताया कि जिस प्रॉपर्टी पर होटल का निर्माण हो रहा है, वो संस्था की प्रॉपर्टी है और नियमानुसार उसको 30 साल की लीज पर होटल व्यवसायी को दिया गया है. पूर्व में भी यहां व्यावसायिक गतिविधियां होती रही हैं. पहले डाकघर और फिर प्रिंटिंग प्रेस के लिए ये प्रॉपर्टी दी गई है. हमारी संस्था फिलहाल चार शैक्षणिक संस्था और लड़कियों के लिए हॉस्टल चला रहा है.
- बसंत कन्या महाविद्याल
- बसंत कन्या इंटर कॉलेज
- बीटीएस हायर सेकेंडरी स्कूल
- एनी बेसेंट स्कूल (एबीएस)
- बसंत बालिका विहार (8 हॉस्टल)
इस निर्माणाधीन होटल का किसी शैक्षणिक संस्था और हॉस्टल से कोई लेना देना नही होगा. सबका अपना दायरा होगा.
संस्था को अतिरिक्त आय हो सके और हम अन्य शैक्षणिक और आध्यात्मिक गतिविधियां सुचारु रूप से चला सके इसलिए इस प्रॉपर्टी को हमने लीज पर दिया है. प्रॉपर्टी हमारी ही रहेगी. हमने रोप वे स्टेशन के लिए भी अपनी प्रॉपर्टी दी है क्योंकि ये वाराणसी के हित में था और होटल के लिए भी अपनी प्रॉपर्टी लीज पर दी है क्योंकि हमें आय का स्रोत बढ़ाना था.