कुतुब मीनार से 3 गुना ऊंचा… वृंदावन के इस मंदिर का PM मोदी कर सकते हैं लोकार्पण, शिखर से दिखता है ताज

मथुरा के वृंदावन में देश का सबसे ऊंचा चंद्रोदय मंदिर बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण PM मोदी इसी महीने के आखिर में किसी भी दिन कर सकते हैं. कुतुब मीनार से तीन गुना अधिक ऊंचा इस भव्य मंदिर (210 मीटर) के शिखर से आगरा का ताजमहल भी दिखता है. लगभग 700 करोड़ की लागत से 12 साल में बना यह मंदिर, द्रविड़, नागर और आधुनिक शैलियों का संगम है, जिसकी नींव 55 मीटर गहरी है.

वृंदावन का चंद्रोदय मंदिर Image Credit:

उत्तर प्रदेश के मथुरा में देश का सबसे विशाल चंद्रोदय मंदिर बनकर तैयार है. वृंदावन में बने इस बेहद भव्य और दिव्य मंदिर का लोकार्पण इसी महीने के आखिर में होना प्रस्तावित है. इसके लिए मंदिर प्रबंधन समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा है. यह मंदिर दिल्ली के कुतुब मीनार से 3 गुना ऊंचा है. बड़ी बात यह कि इस मंदिर के शिखर से आगरा का ताजमहल भी नजर आता है. वृंदावन-छटीकरा मार्ग स्थित अक्षय पात्र मंदिर कैंपस में इस मंदिर का शिलान्यास आठ मार्च 2014 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था.

फिर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 16 नवंबर 2014 को निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया. इस मंदिर का निर्माण इस्कॉन बेंगलुरु ने कराया है. करीब 12 साल में बने इस मंदिर की अनुमानित लागत करीब 700 करोड़ रुपये आई है. 70 मंजिल की इस दिव्य और भव्य मंदिर की खूबसूरती दूर से ही नजर आती है. विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 210 मीटर ऊंचे इस मंदिर के शिखर से 90 किमी दूर आगरा का ताजमहल भी नजर आता है.

सभा को संबोधित करेंगे पीएम

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी मई के आखिर में वृंदावन आएंगे. उस समय वह पहले इस मंदिर का लोकार्पण करेंगे और फिर मंदिर परिसर में ही बन रहे मंच से एक सभा को भी संबोधित करेंगे. मंदिर प्रबंधन के मुताबिक प्रधानमंत्री से इस कार्यक्रम के लिए समय मांगा गया है. प्रधानमंत्री की ओर से हरी झंडी तो मिल गई है, लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय से कंफर्मेशन नहीं आया है. ऐसे में उम्मीद है कि मंदिर के उद्घाटन का कार्यक्रम 25 से 30 मई के बीच कभी भी हो सकता है.

55 मीटर गहरी है मंदिर की नींव

चंद्रोदय मंदिर प्रबंधन के मुताबिक इस मंदिर की सुरक्षा का खास ख्याल रखा गया है. सुरक्षा के लिहाज से ही मंदिर की नीव 55 मीटर गहरी बनाई गई है. वहीं मंदिर का आधार करीब 12 मीटर ऊंचा रखा गया है. उल्लेखनीय है कि दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की नींव भी महज 50 मीटर ही गहरी है. इस मंदिर के तीन मंजिलों पर चैतन्य महाप्रभु और राधा-कृष्ण, कृष्ण-बलराम और सुभद्रा के मंदिर हैं. वहीं बाकी मंजिलों पर अन्य तरह के धार्मिक स्थान बनाए गए हैं.

मंदिर के चारो ओर होंगे द्वादस कानन

मंदिर प्रबंधन के मुताबिक इस मंदिर की डिजाइनिंग पर काफी काम किया गया है. मंदिर का निर्माण जहां द्रविड़, नागर और आधुनिक शैली में किया गया है, वहीं मंदिर 4डी तकनीक से देवलोक और देवलीलाओं के दर्शन भी कराए जाएंगे. इसी प्रकार मंदिर के चारों ओर 12 वन क्षेत्र (द्वादश कानन) विकसित किए जा रहे हैं. इन वनों में अलग अलग तरह की वनस्पति की किस्में, चारागाह, सुंदर पेड़, तरह-तरह की लताएं भी होंगे. इसके अलावा सुंदर तालाब, जिसमें कमल और कुमुद के फूल होंगे. इसी प्रकार यहां कृत्रिम पहाड़ियां और झरने भी हैं.

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