योगी सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे को किया बर्खास्त, सरकारी सेवा के लिए भी अनफिट घोषित
योगी सरकार ने अलपसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे को बर्खास्त कर सरकारी सेवा के लिए अनफिट घोषित कर दिया है. उनपर वित्तीय अनियमितताओं समेत 15 आरोप लगे थे. इनमें 14 आरोप सही पाए गए, जिसके बाद शासन की तरफ से ये कड़ा फैसला लिया गया.
योगी सरकार ने अलपसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडे को सेवा से बर्खास्त कर दिया है. साथ ही उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया गया है. शेषनाथ पांडे पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप थे, जो जांच में सिद्ध हो गए. इसी के चलते सरकार ने ये कड़ा फैसला लिया है.
15 में 14 आरोप सही पाए गए
शेषनाथ पांडे की बर्खास्तगी का फैसला जांच अधिकारी की रिपोर्ट, अभिलेखीय साक्ष्य, संबंधित अधिकारी के जवाब और लोक सेवा आयोग की सहमति के बाद लिया गया है. शेषनाथ पांडे पर 15 आरोप लगाए गए थे. इनमें से 14 आरोप सही पाए गए, जिसके बाद सरकार ने शेषनाथ पांडे की बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया.
शेषनाथ पांडे पर लगे थे ये आरोप
शेषनाथ पांडे ने वित्तीय अनियमितताएं, कदाचार, तथ्यों को छिपाने, न्यायिक आदेशों की अनदेखी और नियमों के विरुद्ध आदेश पारित कर अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप सिद्ध पाए गए. शासन ने इसे उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (आचरण) नियमावली, 1956 का उल्लंघन माना है.
अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिए फैसले
शेषनाथ पांडे पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का वित्तीय अनुमोदन बहाल कर वेतन भुगतान का आदेश दिया था, जिसको लेकर कोई वैध प्रतिनियुक्ति आदेश नहीं था. उसकी सेवा पहले ही समाप्त की जा चुकी थी. उनके इस आदेश के बाद एक ही पद पर दो लोगों को भुगतान देने की स्थिति बन गई. लेकिन इस तरह का फैसला लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था.
लोकसेवा आयोग की सहमति के बाद बर्खास्तगी
उ.प्र. अशासकीय मदरसा विनियमावली, 1987 एवं संशोधित विनियमावली, 2016 के प्रावधानों का उल्लंघन का आरोप साबित होने के बाद शासन ने 23 फरवरी 2026 को लोकसेवा आयोग से बर्खास्तगी की सहमति मांगी थी. आयोग ने 28 फरवरी को दंड पर सहमति दी. अब राज्यपाल से अप्रूवल मिलने के बाद शेषनाथ पांडे के बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया.
