अंगीठी पर खाना और किराए का आशियाना… तीन-तलाक पीड़ितों की दर्दभरी दास्तां; अब योगी सरकार देगी पक्की छत
योगी सरकार तीन तलाक, निराश्रित और एसिड अटैक पीड़िताओं को सशक्त कर रही है. मुरादाबाद की इकरा और फरज़ाना जैसी पीड़िताओं को इस पहल से नया संबल मिला है. प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें पक्की छत मिलेगी, साथ ही आयुष्मान भारत कार्ड से मुफ्त इलाज भी.
योगी सरकार ने तीन तलाक पीड़ित, निराश्रित और एसिड अटैक की शिकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद महिला कल्याण विभाग अब ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान देने की तैयारी में जुट गया है.
सरकार की इस कल्याणकारी मुहिम के तहत न सिर्फ सिर छुपाने के लिए पक्की छत मिलेगी, बल्कि इन पीड़ित महिलाओं को आयुष्मान भारत कार्ड और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के जरिए मुफ्त इलाज की सुविधा भी दी जाएगी, फिलहाल विभाग द्वारा प्रदेश स्तर पर ऐसी सभी महिलाओं का पूरी तरह सत्यापित और विस्तृत डेटा इकट्ठा किया जा रहा है.
तीन तलाक के दर्द को बयां करती इकरा की कहानी
इस संवेदनशील फैसले का सबसे बड़ा असर मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रहमत नगर, करूला जैसे इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां कई पीड़ित महिलाएं सालों से बेहद दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रही हैं. इस रणनीति से समाज की मुख्यधारा से कटी और अपने हक के लिए संघर्ष कर रही महिलाओं को नया संबल मिलेगा.
कटघर के रहमत नगर (करूला) की रहने वाली इकरा की कहानी तीन तलाक के दर्द और लाचारी को बयां करती है. इकरा का निकाह साल 2021 में हुआ था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल वालों के उकसावे में आकर उनके पति ने उन्हें तीन तलाक दे दिया था, इतना ही नहीं, पति ने दो मासूम बच्चों के साथ इकरा को घर से बाहर निकाल दिया था.
फिलहाल इकरा अपने तीन साल के बेटे और दो साल की बेटी के साथ किराए के मकान में रह रही हैं, इकरा ने बताया कि उनका गुजारा माता-पिता के सहयोग से बेहद मुश्किल से कट रहा है, सरकार की इस नई योजना की जानकारी मिलने पर भावुक इकरा ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि उन्हें इस पक्के मकान और सरकारी मदद की सख्त जरूरत है.
पीड़िता फर्ज़ाना की आपबीती भी रोंगटे खड़े करने वाली
इसी इलाके की रहने वाली दूसरी पीड़िता फ़र्ज़ाना की आपबीती भी रोंगटे खड़े करने वाली है. फर्ज़ाना को उनके पति ने सिर्फ इसलिए तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया क्योंकि बड़े ऑपरेशन से उनकी पहली संतान एक बेटी हुई थी, जबकि पति को लड़के की चाहत थी. आज फ़र्ज़ाना अपनी 9 साल की बेटी और बूढ़ी मां का पेट पालने के लिए सिलाई करती हैं.
पीड़िता फ़र्ज़ाना के घर पर पक्की छत तक नहीं है और बिना गैस सिलेंडर के वह अंगीठी पर खाना बनाने को मजबूर हैं. सरकार द्वारा आवास और मुफ्त इलाज की तैयारी पर खुशी जताते हुए फ़र्ज़ाना ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा किया और कहा कि अगर सरकार गरीबों की यह मदद करती है, तो यह बहुत सराहनीय कदम होगा है.
स्थानीय व्यक्ति रईस चौधरी ने बताया तीन तलाक पीड़िता अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए दिन-रात मेहनत-मजदूरी और सूट सिलने का काम करती हैं. आर्थिक तंगी और घरेलू परेशानियों के चलते वह अपनी 9 साल की बेटी को स्कूल भी नहीं पढ़ा सकीं है, ऐसे में नई व्यवस्था शुरू करने की घोषणा से इन पीड़ित महिलाओं में उम्मीद की एक नई किरण जागी है.