नोएडा: POCSO एक्ट के दोषी को 10 साल की सजा, कोर्ट ने कहा- नाबालिग से अन्याय बर्दाश्त नहीं

नोएडा पॉक्सो एक्ट मामले में अदालत ने दोषी को 10 साल कठोर कारावास और 70,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. कोर्ट ने कहा कि नाबालिग के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अदालत ने पीड़िता को आरोपी के जुर्माने की 80% राशि मुआवजे के तौर पर देने का भी आदेश दिया है.

पॉक्सो एक्ट दोषी को 10 साल की सजा

नोएडा के सेक्टर 20 थाना क्षेत्र से जुड़े पॉक्सो एक्ट के मामले में सोमवार को कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया. कोर्ट ने दोषी को 10 साल जेल और 70,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. जुर्माना न भरने पर उसे 7 महीने की अतिरिक्त कैद भी काटनी होगी. साथ ही कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नाबालिग के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

गौतमबुद्ध नगर जिला एंव सत्र न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विकास नागर की अदालत ने यह फैसला दिया. बिहार के सहरसा का रहने वाला फारुख ने 29 फरवरी 2016 को एक 16 वर्षीय बच्ची,जो 10वीं कक्षा की छात्रा थी. उसका तड़के अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था.

अलग-अलग जगहों पर ले जाकर किया था दुष्कर्म

एडीजीसी क्राइम जयप्रकाश भाटी ने बताया कि पीड़िता के पिता ने एफआईआर में बताया था कि 29 फरवरी 2016 को उनकी 16 वर्षीय बेटी का अपहरण हुआ. आरोपी फारुख घर से एक लाख रुपये के गहने और 50 हजार रुपये नकद भी ले गया था. इस मामले में जांच अधिकारी ने 13 जून 2016 को आरोप पत्र दाखिल किया.

आरोपी ने दोषी न होने का दावा कर मुकदमे की मांग की अभियोजन पक्ष ने कुल 6 गवाह दाखिल किए. 21 नवम्बर 2025 को अदातल ने फारूक को आईपीसी की धारा 366-367 चार पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी करार दिया. अदालत ने पाया कि फारुख ने लड़की को अपहरण कर जबरन शादी के लिए दबाव बनाया और उसे अलग-अलग जगहों पर ले जाकर दुष्कर्म किया.

अदालत बताया अमानवीय कृत्य, दी कठोर सजा

अदालत ने इसे अमानवीय और कानून के खिलाफ कृत्य बताया. साथ ही कहा कि पक्सो एक्ट धारा-4 के तहत 10 साल की कठोर कारावास और 70,000 रुपये जुर्माना देना पड़ेगा. जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त कैद, 2 साल की सजा और 20,000 रुपये जुर्माना. और दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी, क्योंकि अपराध एक ही क्रम में किए गए थे.