‘सुप्रीम कोर्ट की बात सबको स्वीकारनी होगी’, यूजीसी के नए नियमों की रोक पर बोले अखिलेश यादव
यूजीसी नियमों की रोक को लेकर कोर्ट के फैसल पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान कहता है कि किसी के साथ भेदभाव ना हो. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की बात सबको स्वीकारनी होगी. निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होने चाहिए. साथ ही दोषी बचने नहीं चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दिया है. कोर्ट ने कहा कि यूजीसी के नए नियम की भाषा अस्पष्ट है. इससे इसके दुरुपयोग होने का खतरा है. ऐसे में इस नियम की रि-ड्राफ्टिंग तक यूजीसी 2026 कानून के लागू होने पर रोक रहेगा. इस दौरान 2012 के यूजीसी नियम लागू रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को लेकर यूजीसी और सरकार को नोटिस भी किया है. साथ ही कमेटी बनाने का निर्देश दिया है. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की भी प्रतिक्रिया सामने आई है.
अखिलेश यादव यूजीसी नियमों की रोक पर दी प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान कहता है कि किसी के साथ भेदभाव ना हो. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की बात सबको स्वीकारनी होगी. निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होने चाहिए. साथ ही दोषी बचने नहीं चाहिए. अखिलेश यादव ने अपने X अकाउंट पर भी एक पोस्ट किया है. इसमें उन्होंने लिखा है कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है. क़ानून की भाषा भी साफ़ होनी चाहिए और भाव भी. बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है. न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय. न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी.
बता दें कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ बवाल मचा हुआ. सर्वण लगातार एकतरफा कानून बताते हुए इसका विरोध कर रहे थे. इस नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बारह पिटीशन्स फाइल की गई थी. फिलहाल, कोर्ट ने यूजीसे के नए नियमों पर रोक लगा दी है. अब इसपर अगली सुनवाई 19 मार्च होगी.
कोर्ट ने यूजीसी के नियमों पर रोक लगाते हुए क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट कहा यूजीसी के नियमों को लेकर कहा प्रथम दृष्टया देखने पर ऐसा लग रहा है कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है. इसके दुरुपयोग होने का खतरा बना रहेगा. ऐसे में इन नियमों की फिर से जांच की जरूरत है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस विषय पर फिर से रेगुलेशन बनाने को कहा है. तब तक ये नियम लागू नहीं किए जाएंगे.
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने जताई ये चिंता
CJI सूर्य कांत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि 75 साल में हम वर्गहीन समाज के लिए जो कुछ हासिल कर पाए हैं, उससे पीछे उससे पीछे जा रहे हैं. उन्होंनेसमाज में बढ़ती वर्गीय और पहचान आधारित विभाजन की प्रवृत्तियों पर भी चिंता जताई. वहीं, वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हम इस अमेरिका की उस स्थिति में नहीं पहुंचेगे जब वहां अश्वेत और श्वेत बच्चों को अलग-अलग स्कूलों में पढ़ना पड़ता था.
