न लग्जरी कार, न आलीशान कोठी… 90 साल के आलम बदी, जिन्हें कहा जाता है ‘सबसे ईमानदार MLA’

आजमगढ़ के 90 साल के सबसे वरिष्ठ विधायक आलम बदी की सादगी और ईमानदारी की कहानी हर जुबान पर है. एक छोटे से घर में परिवार के साथ रहने वाले आलम बदी 1996 से समाजवादी पार्टी के टिकट पर 5 बार विधायक चुने जा चुके हैं. इंजीनियरिंग डिप्लोमा के बाद राजनीति में आए, लेकिन कभी मंत्री नहीं बने. मुलायम और अखिलेश के ऑफर ठुकराकर कहा कि नौजवानों को मौका दो. आज भी पुरानी बोलेरो या बाइक से चलते हैं.

सपा के टिकट पर पांचवी बार विधानसभा पहुंचे हैं आलम बदी

आजमगढ़ जनपद का एक ऐसा विधायक, जो 90 साल की उम्र में भी जवान है… जो शहर की एक छोटी सी गली में एक बड़े के साथ परिवार रहता है… उनके अंदाज और उनके रहन-सहन से यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं. इनका नाम है आलम बदी… एक विधायक का रसूख बड़ा होता है लेकिन बदी साहब की रहन-सहन से रसूख नजर नहीं आता. आइए हम आपको बताते हैं आलम बदी की पूरी कहानी-

16 मार्च 1936 को जन्मे आलम बदी की ईमानदारी के किस्से हर ओर चर्चा में रहते हैं. आजमगढ़ के विंदावल के रहने वाले आलम बदी ने 12वीं तक की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया. राजनीति में आने से पहले आलम बदी इंजीनियर थे. उनकी शादी कुदैशा खान से हुई और उनके 6 बच्चे हैं. आलम बदी 1996 में पहली बार समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े और जीत गए.

पांचवीं बार विधायक बने आलम बदी

वैसे तो नौकरी छोड़कर इंजीनियरिंग की राजनीति में आना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन आलम बदी को जनता की सेवा करना ज्यादा जरूरी लगा. केवल एक बार 2007 में चुनाव हारे थे. उसके बाद से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते. हर चुनाव में आलम बदी के प्रचार का तरीका खासा चर्चा में रहता है. आलम बदी कभी भी लाव लश्कर के साथ नहीं चलते हैं. कई बार तो यह रिपोर्ट आई कि उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार में 2 से 3 लाख रुपए में ही खर्च किए.

मुलायम और अखिलेश के कहने के बावजूद भी नहीं बने मंत्री

आलम बदी को मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने बहुत बार ऑफर किया कि वह मंत्री बन जाएं, लेकिन उन्होंने कहा कि मंत्री किसी नौजवान को बनाया जाए. 2004 और 2012 में जब-जब ऑफर मिला, तब-तब आलम बदी ने यह सुझाव दिया. आलम बदी का यह मानना है कि वह अगर मंत्री बन जाएंगे तो वह इलाके की जनता से कहीं ना कहीं दूर हो जाएंगे.

मुलायम सिंह यादव को दिए एक गोपनीय सुझाव ने बदला था 2014 का परिणाम

2014 में मुलायम सिंह यादव, आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे. तभी नेताओं की कार्यशैली और अपने कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट देखकर आलम बदी ने मुलायम सिंह यादव को बताया कि अगर यही हालत रहे तो आपका चुनाव खतरे में पड़ सकता है. खास बात है कि एक तरफ सारे नेताओं ने उन्हें (मुलायम) पॉजिटिव रिपोर्ट भेजी थी, वहीं आलम बदी ने मुलायम सिंह यादव को वह कमी बताई, जिससे उनका चुनाव प्रभावित हो सकता था.

इसके बाद धर्मेंद्र यादव को 2014 के चुनाव प्रचार के लिए कई विधानसभा क्षेत्र में कैंपेन करने के लिए भेजा गया. इस दौरान उनके सामने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में बाहुबली रमाकांत यादव थे, जिनकी लोकप्रियता की वजह से मुलायम सिंह का चुनाव भी खतरे में आ गया था और कई विधानसभा क्षेत्र में लोगों ने अपने घरों के ऊपर बीजेपी का झंडा लगा लिया था लेकिन धर्मेंद्र की कोशिश के कारण यह लोग फिर सपा के पाले में आ गए थे.

ना कमीशन खोरी करेंगे, ना करने देंगे

आलम बदी और उनकी पूरी टीम के ऊपर आज तक कभी यह आरोप नहीं लगा कि उन्होंने कभी भी किसी भी ठेकेदार या विधानसभा क्षेत्र में किसी काम के नाम पर कमीशन लिया हो, क्योंकि आलम बदी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि ना मैं कमीशन खाता हूं और ना ही अपने बच्चों को ठेकेदार से मिलने के लिए कहता हूं. आलम बदी अपने विधानसभा क्षेत्र में हुए कार्यों की गुणवत्ता की भी स्वयं ही जांच करते हैं.

नौ विधायक फॉर्च्यूनर से चलते हैं और एक विधायक पुरानी बोलेरो से

आजमगढ़ जनपद के सभी विधायक फॉर्च्यूनर या अन्य महंगी गाड़ियों से चलते हैं लेकिन आलमबदी आज भी पुरानी मॉडल बोलेरो से चलते हैं. ज्यादातर तो लोग उन्हें बाइक पर भी देखते हैं. आलम बदी के 6 बच्चे हैं, लेकिन राजनीति में सिर्फ एक बेटा सक्रिय है और बाकी नौकरी करते हैं. 2022 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, आलमबदी के पास 50 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है. इसमें 10 लाख की बुलोरे शामिल है. उनके पास सिर्फ 30 लाख रुपये की अचल संपत्ति है.