‘प्रशासन से गलती हुई, चरणों में जा कर माफी मांगनी चाहिए’, अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले अनिरुद्धाचार्य महाराज

प्रयागराज में प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बीच चल रहे विवाद पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि प्रशासन की ओर से गलती हुई है. चरणों में जा कर माफ़ी मांगनी चाहिए. संविधान सबके लिए बराबर होता है तो प्रशासन के लिए भी यही नियम होता होता है.

अनिरुद्धाचार्य

प्रयागराज में प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस मामले में अनिरुद्धाचार्य महाराज की भी प्रक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से गलती हुई है. चरणों में जा कर माफ़ी मांगनी चाहिए. एटीट्यूड में नहीं रहना चाहिए. संत माफ कर देते हैं.

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि संविधान सबके लिए बराबर होता है तो प्रशासन के लिए भी यही नियम होता होता है. संतों की चुटिया पकड़ के घसीटना, उनके साथ मारपीट और उनको अपमानित करना कहां का संविधान है?

कहां से शुरू हुआ विवाद?

प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच स्नान के लिए पालकी से उतर कर पैदल जाने की बात पर विवाद हो गया था. दरअसल , प्रशासन चाहता था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्नान के लिए पैदल जाएं. लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य इसके लिए राजी नहीं थे. इसी बात को लेकर पुलिस और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के बीच तीखी बहस हो गई. आरोप है पुलिस ने इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट की. उन्हें घसीटा. इससे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज होकर शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए.

प्रशासन ने भेजे अविमुक्तेश्वरानंद को 2 नोटिस

यह सब विवाद चल ही रहा था कि प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेज दिया. प्रशासन ने जवाब मांगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगा रहे हैं, जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है. अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को भेजे अपने जवाब में नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया. उन्होंने कहा कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि जिससे अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका जाए.

इस बीच आज यानी गुरुवार को प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजा. इसमें प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद से जवाब मांगा कि क्यों ना आपकी एंट्री मेला क्षेत्र में हमेशा के लिए बैन कर दिया जाए. आपको मेला क्षेत्र में दी गई जमीन को निरस्त कर दिया जाए क्योंकि आपके मेले की व्यवस्था खराब हुई. लोगों की सुरक्षा पर खतरे में पड़ी.

परेड कराने और सार्वजनिक उपहास उड़ाने का लगाया आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नोटिस के जवाब में कहा कि पालकी से चलना सनातन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है. यह परंपरा 2500 साल पुरानी है और शंकराचार्य के काल से है. उन्होंने अधिकारियों पर शंकराचार्य की मर्यादा भंग करने, अनुयायियों के साथ मारपीट और अपमान करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार हुआ है. परेड कराया गया और सार्वजनिक उपहास उड़ाया गया. पालकी को जानबूझकर खतरनाक जगह ले जाया गया. नदी में गिराने की कोशिश की गई. उन्होंने इसे हत्या के प्रयास के बराबर बताया.