नसीमुद्दीन की ‘काट’ नौशाद: मायावती ने सौंपी चार मंडलों की कमान, आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ की भी दमदार वापसी
2027 यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मायावती ने बसपा में बड़े संगठनात्मक फेरबदल किए हैं. नौशाद अली का कद बढ़ाते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के चार महत्वपूर्ण मंडलों कानपुर, लखनऊ, आगरा और मेरठ की कमान सौंपी गई है. वहीं, अशोक सिद्धार्थ को दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे चार राज्यों का मुख्य केंद्रीय प्रभारी बनाया गया है.
यूपी विधानसभा चुनाव में अब केवल साल भर का वक्त बाकी है. सभी राजनीतिक पार्टियां एक्टिव मोड में आ चुकी हैं. रणनीतियां तैयार की जा रही हैं. अब बसपा ने भी बड़े संगठनात्मक फेरबदल किए हैं. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को प्रमुख भूमिका सौंपी है.
अशोक सिद्धार्थ और नौशाद अली को मिली ये जिम्मेदारी
अशोक सिद्धार्थ को दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे चार राज्यों का मुख्य केंद्रीय प्रभारी बनाया गया है. यह पार्टी की राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति का संकेत देता है. पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरे नौशाद अली का कद बढ़ाते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के चार महत्वपूर्ण मंडलों कानपुर, लखनऊ, आगरा और मेरठ की कमान सौंपी गई है. नौशाद अली के जरिए बसपा पूर्व मायावती मुसलमानो को साधने की बड़ी कोशिश कर रही है.
2007 के सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले की राह पर मायावती
बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम, दलित और ब्राह्मणों के जरिए सत्ता में वापसी करना चाहती है. मायावती इसपर काम करती हुई भी नजर आ रही हैं. सतीश चंद्र मिश्र को मुख्य तौर पर ब्राह्मण चेहरे के तौर पर आगे कर वह ब्राह्मणों के मुद्दे पर मुखर होकर समय-समय पर अपनी बात रख रही हैं. यूजीसी से लेकर शंकराचार्य व अन्य मुद्दों पर ब्राह्मणों के साथ खड़ी नजर आ रही है. यहां तक की घूसखोर पंडत फिल्म के टाइटल पर भी मायावती ने एतराज जताया था.
मायावती ने पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस कर इस बात के संकेत दिए थे कि वह 2007 के सोशल इंजीनियरिंग वाले फॉर्मूले को अपनाने की कोशिश में हैं. इसी कड़ी में मायावती इस बार दलित मुस्लिम और ब्राह्मणों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है. अगर ऐसा होगा तो मायावती के लिए 2027 की राह आसान हो सकती है. ऐसे में संगठन में यह फेरबदल BSP के ‘मिशन 2027’ का हिस्सा है
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की काट के तौर पर नौशाद अली
राजनीतिक विश्लेषक आदेश शुक्ला इसे पूर्व BSP नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के हालिया समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद पश्चिमी यूपी में दलित-मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने की ‘काट’ माना रहे हैं. लेकिन उनका यह भी कहना है कि इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ने वाला है. जो बसपा के वोटर हैं वह हमेशा मायावती के साथ रहा है.
नौशाद अली को जिन चार मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है वे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं. यहां दलित, मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह कदम अल्पसंख्यक वर्ग को मजबूत करने और अन्य समुदायों में प्रभाव बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है. इसी महीने की शुरुआत में मायावती ने पार्टी में ब्लॉक और सेक्टर स्तर तक पुनर्गठन का फैसला लिया था. इसमें 50 प्रतिशत युवाओं को मौका देने और कुछ अहम पदों को समाप्त करने का निर्णय शामिल था.
रामजी गौतम के पर कतरने की भी चर्चा
बदलावों में रामजी गौतम के पर कतरने की भी चर्चा है. पहले राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख भूमिका निभाने वाले रामजी गौतम से दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है. अब उन्हें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का प्रभार सौंपा गया है. इसी तरह, राजाराम को पहले सिर्फ महाराष्ट्र की जिम्मेदारी थी, लेकिन अब उन्हें मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड का प्रभारी बनाया गया है. पूर्व सांसद गिरीश चंद्र को उत्तराखंड और सुमरत सिंह को राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया है. ये बदलाव पार्टी में नई ऊर्जा लाने और वफादार कार्यकर्ताओं को मायावती ने आगे किया है.
अशोक सिदार्थ को 5 महीने पहले फिर पार्टी में लिया था वापस
मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिदार्थ को पांच महीने पहले, सितंबर 2025 में मायावती ने उन्हें माफ करके पार्टी में वापस लिया था, जब सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था .इससे पहले, 12 फरवरी 2025 को मायावती ने अशोक और उनके करीबी नितिन सिंह पर गुटबाजी और पार्टी-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए पार्टी से निकाल दिया था.
आकाश आनंद को भी पद से हटाया गया था
मार्च 2025 में आकाश आनंद को भी पद से हटाया गया था, लेकिन अप्रैल में माफी के बाद उन्हें वापस लिया गया. अब अशोक सिद्धार्थ को राष्ट्रीय पदाधिकारियों में प्रमुख स्थान देकर मायावती ने साफ संदेश दिया है कि BSP परिवारवाद से ऊपर उठकर संगठन की मजबूती पर फोकस कर रही है.
