मुरादाबाद सपा में घमासान, एसटी हसन और रुचि वीरा के बीच वाकयुद्ध; अखिलेश यादव ने दी चेतावनी
मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी की सांसद रुचि वीरा और एसटी हसन के बीच चल रही गुटबाजी ने विकराल रूप ले लिया है. दोनों के बीच जारी वाकयुद्ध अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक जा पहुंच गया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की. इसे अनुशासनहीनता बताते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान बढ़ता जा रहा है. सांसद रुचि वीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच चल रहा वाकयुद्ध पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक जा पहुंचा है. इस गुटबाजी और सार्वजनिक बयानबाजी पर सपा अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे स्पष्ट रूप से अनुशासनहीनता करार दिया है.
गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में डॉ. एसटी हसन का टिकट काटकर रुचि वीरा को प्रत्याशी बनाया गया थी. इस कदम के बाद से ही दोनों नेताओं के बीच तल्खी बनी हुई है. हाल ही में एसटी हसन की बेटी के निकाह और उसमें बीजेपी विधायक की मौजूदगी को लेकर रुचि वीरा द्वारा की गई टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया है.
अपनी ही पार्टी के नेताओं पर कीचड़ उछालना बर्दाश्त नहीं
यह मामला अखिलेश यादव तक पहुंचा चुका है, जिसके बाद उन्होंने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कहा कि अपनी ही पार्टी के नेताओं पर कीचड़ उछालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसा करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. सपा प्रमुख ने आपसी मतभेदों को छोड़कर आगामी चुनावी तैयारियों और संगठन के कार्यों में जुटने के निर्देश दिए.
मुरादाबाद के जिला अध्यक्ष जयवीर यादव ने पार्टी की पुरानी गाइडलाइन का हवाला देते हुए स्थानीय नेताओं को मर्यादा में रहने की सख्त हिदायत दी है. उन्होंने कहा कि यदि किसी भी पदाधिकारी, कार्यकर्ता या जनप्रतिनिधि को आपस में कोई मनमुटाव या शिकायत है, तो उसे सार्वजनिक मंचों, सोशल मीडिया पर साझा करने के बजाय पार्टी के आंतरिक फोरम पर उठाएं.
आपसी रंजिशों को दरकिनार कर आगामी चुनाव पर ध्यान दें
जयवीर यादव ने कहा कि नेता अपनी बात जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष या सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष रख सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप लगाना पार्टी की छवि को धूमिल करता है. हाईकमान ने इस व्यवहार को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा है. व्यक्तिगत रंजिशों को दरकिनार कर आगामी चुनाव पर ध्यान दें.
पार्टी के भीतर बढ़ती दरार को पाटने के लिए संगठन ने अब प्रचार सामग्री को लेकर भी नए नियम लागू किए हैं. जिला अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि जिले में कहीं भी लगाए जाने वाले बैनर, पोस्टर, होर्डिंग्स, पैंफलेट या स्टीकर पर क्षेत्रीय सांसद और संबंधित विधायक का फोटो और नाम होना अनिवार्य होगा. ताकि पार्टी की एक एकजुट छवि पेश की जा सके.
पार्टी अनुशासन का उल्लंघन बर्दाश्त नहींं किया जाएगा
अक्सर देखा जाता है कि स्थानीय नेता अपने पसंदीदा गुट के नेताओं की तस्वीरें ही पोस्टरों में लगाते हैं, जिससे आपसी वैमनस्य बढ़ता है. अखिलेश यादव ने सभी नेताओं को चेताया है कि वे निजी बयानबाजी बंद कर ‘SIR’ (संगठनात्मक कार्यों) और चुनाव प्रचार में अपनी ऊर्जा लगाएं. अनुशासन का उल्लंघन बर्दाश्त नहींं किया जाएगा, चाहे उसका कद कितना भी बड़ा क्यों न हो.
