3 करोड़ वोट कहां गए? SIR को लेकर अखिलेश यादव ने पूछा सवाल, दिया ‘वोट न कटने देने’ का नारा
यूपी में SIR की प्रक्रिया के बाद मतदाताओं की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो गई. अखिलेश यादव लगातार इसपर सवाल उठा रहे हैं. अब उन्होंने अपने X अकाउंट पर आशंका जाहिर करते हुए लिखा है कि दावे और आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान उनकी पार्टी के कोर वोटरों के नाम कटवाए जा सकते हैं. इसके अलावा उन्होंने पंचायत और नगर निकाय चुनाव के वोटर्स के मुकाबले ड्राफ्ट लिस्ट में 3 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब होने पर भी सवाल उठाए हैं.
यूपी में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो गई है. इसके बाद से ही प्रदेश में राजनीतिक हलचलें भी तेज हो गई हैं. तकरीबन 3 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. इसको लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है. हालांकि, ये SIR की फाइनल लिस्ट नहीं है. चुनाव आयोग की तरफ से इस लिस्ट पर इसपर 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावा और आपत्ति का समय भी दिया गया है. ऐसे में फाइनल वोटर लिस्ट में कई नाम काटे और बढ़ाए जा सकते हैं. विपक्षी पार्टियां इसको लेकर आशंकित हैं. इसको लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी अपने X अकाउंट पर एक ट्वीट किया है.
अखिलेश यादव ने पहले SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में मतदाताओं की संख्या को लेकर सवाल उठाया. अब एक नए ट्वीट में वह आशंका जाहिर कर रहे हैं कि उनकी पार्टी के कोर वोटरों के नाम मतदाता सूची से दावे और आपत्तियों के दौरान कटवाए जा सकते हैं.
वोटों को काटने की साजिशों को ना होने दें कामयाब: अखिलेश
अखिलेश यादव ने अपने X अकाउंट पर लिखा कि हर मतदाता और हर एक ‘पीडीए प्रहरी’ से एक बार फिर ये अपील है कि पीडीए समाज के वोटों को काटने की किसी भी साज़िश को कामयाब न होने दें. ‘पीडीए प्रहरी’ के प्रयासों के बावजूद भी अभी भी पीडीए समाज के करोड़ों वोट काटे गये हैं. अब पीडीए प्रहरी को हर बूथ पर गहन जांच पड़ताल करनी है और ‘एक भी वोट न कटने पाए, एक भी वोट न घटने पाए’ के अपने नारे के साथ हम सबको फिर से जुट जाना है, हर एक वोट बचाना है.
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को दिए ये खास निर्देश
उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश देते हुए लिखा हर मतदाता को याद दिलाए कि वोटर लिस्ट में आपके नाम का महत्व क्या है. उन्होंने आगे कहा कि मतदाताओं को ये बता कि वोटर लिस्ट में नाम न होने को आधार बनाकर कहीं भाजपा सरकार कोई ऐसा काला क़ानून न ले आए, जिससे आपका नाम काग़ज़ों से गायब मानकर और फिर उसको सबूत मानते हुए राशन कार्ड, सरकारी योजनाओं, जाति प्रमाणपत्र, नौकरी-आरक्षण, खाते-एकाउंट, शेयर-इन्वेस्टमेंट, बीमा-ड्राइविंग लाइसेंस, ट्रैक्टर-गाड़ी के काग़ज़ात, पैन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, कॉलेज-यूनिवर्सिटी, बिजली-पानी कनेक्शन, खेत-ज़मीन, घर-मकान सबसे आपका नाम कट जाए या कहें बेदख़ली कर दी जाए और आप अपने ही देश में बाहरी साबित कर दिए जाएं.
भाजपा सरकार वोटर लिस्ट से नाम कटवा छिन सकती है आपका हक-अखिलेश
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से कहा कि मतदाताओं को ये समझाएं वोटर लिस्ट में आपका नाम होना ही आपके नागरिक होने की निशानी है. वोटर आईडी को ही अपना नागरिक आईडी मानिए. ज़मीन की भूखी भाजपा सरकार कोई भी ऐसा क़ानून बना सकती है, जिससे आपके सारे हक़-अधिकार, धन-दौलत, सोना-चाँदी, जमा-पूंजी, ज़मीन-जायदाद सब छीन लिए जाएं.
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार निर्विरोध चुनाव लड़वाने का खेल, खेल सकती है, वो चुनाव में वोट काटने के लिए कुछ भी कर सकती है. चुनाव जीतकर सरकार बनाना और फिर भ्रष्टाचार करना और जल, जंगल, ज़मीन पर कब्जा करना ही भाजपा और उनके संगी-साथियों की गुप्त मंशा है. उन्होंने आगे कहा कि इस पत्र को एक चेतावनी मानिए और इस महाभ्रष्ट भाजपा सरकार को हटाने को लिए वोट बनवाइए और अपनी नागरिकता बचाइए व चुनावों में भाजपा के ख़िलाफ़ वोट डालकर ‘अपनी पीडीए सरकार’ बनाइए. साथ ही उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए लिखा चौकन्ना रहें, सजग होकर अपना वोट बनवाएं और अपने नागरिक होने की पहचान बचाएं साथ ही अपने खेत, ज़मीन, घर की मिल्कियत और विरासत भी.
वोट डालकर सरकार बनाने अधिकार ना होने पर और उत्पीड़न होगा-अखिलेश
अखिलेश ने पीडीए समाज को संबोधित करते हुए लिखा कि जब हमारे पास वोट डालकर सरकार बनाने का अधिकार है, तब तो हमारा इतना उत्पीड़न होता है, अगर वोट डालने का निर्णायक अधिकार हमारे ‘पीडीए समाज’ के लोगों के पास नहीं होगा तो हमें कितना प्रताड़ित किया जाएगा. ये वर्चस्ववादी अपनी मनमर्जी की सरकार बनाकर, ढाल की तरह हमारी रक्षा करने वाले संविधान को ही ख़त्म कर देंगे. अपना वोट बचाने का मतलब अपना संविधान और अपने हक़ का आरक्षण व नौकरी बचाना भी है. अपने ट्वीट के अंत में अखिलेश यादव लिखा कि याद रखिए अंत में हमेशा ग़रीब, शोषित, वंचित ही मारा जाता है. इसीलिए ‘पीडीए समाज’ के हर सदस्य से हमारी ये सीधी अपील है कि अपना वोट बनाएं, अपना भविष्य बचाएं!
इससे पहले यूपी की मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट पर उठाए थे गंभीर सवाल
अखिलेश यादव ने 07 जनवरी को भी यूपी में SIR की ड्राफ्ट सूची को लेकर ट्वीट किया था. उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा था कि ये ‘डबल इंजन’ की सरकार है या ‘डबल ब्लंडर’ की सरकार है. उन्होंने सवाल उठाया कि विधानसभा में वोटरों की संख्या तथा पंचायत और नगर निकाय में वोटरों की संख्या में लाखों का अंतर कैसे है.
इस दौरान उन्होंने विधान सभा मतदाता सूची, पंचायत मतदाता सूची , नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची से जुड़े आंकड़े भी शेयर किए थे. उनका कहना है विधान सभा मतदाता सूची SIR के बाद 12.56 करोड़ मतदाता हैं. फिर पंचायत मतदाता सूची (SIR संशोधित अस्थायी) में 12.70 करोड़ मतदाता दर्ज हैं. इसके नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची((चुनाव वर्ष-2023) में लगभग 4.32 करोड़ मतदाता का नाम दर्ज है.
कहां गए 3 करोड़ मतदाता-अखिलेश
उन्होंने आगे लिखा कि यदि यह भी मान लिया जाए कि उत्तर प्रदेश नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची में त्रुटियां हैं और SIR के बाद इसमें अधिकतम 25% (लगभग 1.08 करोड़) मतदाताओं की कमी आती है, तो सुधार के बाद ULB मतदाता सूची में लगभग 3.24 करोड़ मतदाता शेष रहने चाहिए. इस स्थिति में उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची (SIR संशोधित अस्थायी-2026) और उत्तर प्रदेश नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची का कुल योग लगभग 15.80 करोड़ मतदाता होता है. लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट में मतदाताओं की संख्या 12 करोड़ के आसपास है. ऐसे में 3 करोड़ मतदाता कहां गायब हो गए.
निर्वाचन आयोग पर भी उठाया सवाल
अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भारतीय जनता पार्टी के दबाव में ECI पिछड़े वर्गों, दलितों, आदिवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के मताधिकार को सीमित या दबाने का प्रयास कर रहा है?