‘जब भी मुंह खोला तब बुरा बोला’, अखिलेश ने कहा- योगी सरकार का विदाई बजट है
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार के 10वें बजट को विदाई बजट करार दिया है. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी कम होने की बजाय चरम पर है. किसानों की आय भी दोगुनी नहीं हुई है. लेकिन इस बजट में इन क्षेत्रों में बेहतरी लाने का कोई रोडमैप नहीं है.
योगी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल अंतिम बजट आज यानी 11 फरवरी को पेश कर दिया है. अब अखिलेश यादव अखिलेश यादव ने इस बजट को योगी सरकार की विदाई बजट करार दिया है. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ‘ इन्होंने जब भी मुंह खोला तब बुरा बोला’. यह बजट जनता के साथ धोखा है. बीजेपी की सत्ता से विदाई तय हो चुकी है.
अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी की तरफ से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अमेरिका से हुई ट्रेड डील से किसानों पर संकट आने वाला है. यूपी के बजट में इसके लिए तो कोई रोड मैप ही नहीं है. बेरोजगारी कम होने की बजाय चरम पर है. इसके अलावा किसानों की आय भी दोगुनी नहीं हुई है.
पिछले बजटों का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई सरकार- अखिलेश
अखिलेश यादव ने कहा कि योगी सरकार 9 लाख करोड़ के बजट को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है. लेकिन सच्चाई ये है कि हर साल बजट पिछले साल की तुलना में बड़ा ही होता है. लेकिन ये सरकार पिछले बजटों का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई. ये सरकार की विफलता है.
अखिलेश यादव ने GSDP के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए
अखिलेश यादव ने GSDP के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए. सरकार का दावा है कि 2025-26 में GSDP 30.25 लाख करोड़ रुपये है. इस बजट इजाफा भी होना है. लेकिन सरकार 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात कर रही है. ऐसे में प्रदेश की GSDP कम से कम 90 लाख करोड़ रुपये होनी चाहिए.
यह बजट राजनीतिक प्रचार का साधन
अखिलेश यादव ने योगी सरकार की बजट को राजनीतिक प्रचार का साधन करार दिया है. उन्होंने कहा जनता को ऐसे बजटों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भी योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर रहा है. बजट का काफी बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया.
अखिलेश यादव ने MSME को लेकर भी सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने MSME को लेकर सरकार को घेरा है . उन्होंने कहा कि अमेरिकी डील का असर किसानों के बाद लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम( MSME) पर पड़ेगा. फिलहाल, यूपी में 92 लाख MSME हैं. लेकिन इसमें से 82 लाख MSME रजिस्टर्ड नहीं होगा. इस बजट में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है जिससे अमेरीकी डील के दुष्प्रभावों से MSME को बचाया जा सके.
