नोएडा, लखनऊ, वाराणसी… UP के 6 जिलों में RERA की 12 परियोजनाएं, अकेले ग्रेटर नोएडा में बनेंगे 1937 फ्लैट्स

यूपी रेरा ने प्रदेश के 6 जिलों में 12 रियल एस्टेट परियोजनाओं की हरी झंडी दी है. इसके लिए 4100.18 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित किया गया. अकेले नोएडा में कुल 1937 नई आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा.

यूपी रियल एस्टेट की 9 परियोजनाओं को मंजूरी

उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी गति मिलने जा रही है यूपी रेरा ने ग्रेटर नोएडा समेत प्रदेश के छह जिलों में 12 बिल्डर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. इन परियोजनाओं के जरिए न केवल हजारों नए घर बनेंगे बल्कि निवेश रोजगार और निर्माण गतिविधियों में भी तेजी आएगी.

परियोजनाओं में ग्रेटर नोएडा को खास लाभ मिला है. यहां तीन रियल एस्टेट परियोजनाओं को हरी झंडी दी गई है. इन परियोजनाओं के अंतर्गत 1937 नई आवासीय इकाइयों का निर्माण किया जाएगा. इन पर करीब 246059 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. इससे ग्रेटर नोएडा में आवासीय विकल्प बढ़ेंगे और घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी.

छह जिलों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी

यूपी रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी के अनुसार मंजूरी पाने वाली परियोजनाएं गौतमबुद्ध नगर लखनऊ, मथुरा, आगरा, वाराणसी और झांसी में स्थित हैं. इन सभी जिलों में कुल 7147 फ्लैट,विला और दुकानें विकसित की जाएंगी.इन 12 परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में कुल 4100.18 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने की उम्मीद है.

इससे निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों, ठेकेदारों, ट्रांसपोर्ट और अन्य सहयोगी उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा.राजधानी लखनऊ में यूपी रेरा ने पांच रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के तहत 3569 इकाइयों का विकास किया जाएगा जिनमें 2964 आवासीय और 605 व्यावसायिक इकाइयां शामिल हैं. इन पर करीब 109116 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है.

अन्य जिलों में भी आवासीय विकास

वही मथुरा में 30081 करोड़ रुपये की लागत से 504 आवासीय इकाइयों वाली परियोजना को मंजूरी मिली है.आगरा में 20191 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत 949 आवासीय इकाइयां बनाई जाएंगी.वाराणसी में 3692 करोड़ रुपये की परियोजना से 80 घर बनेंगे.झांसी में 8.79 करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत 108 आवासीय इकाइयों का निर्माण होगा.

यूपी रेरा की मंजूरी मिलने से घर खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा. रेरा नियमों के तहत बिल्डरों को तय समय में प्रोजेक्ट पूरा करना अनिवार्य होता है, जिससे लोगों को समय पर घर मिलने की उम्मीद रहती है और धोखाधड़ी की आशंका कम होती है.अधिकारियों का मानना है कि इन परियोजनाओं से रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती मिलेगी. साथ ही सीमेंट, स्टील, इलेक्ट्रिकल और अन्य निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.