1998 में हुई थी मौत, फिर कैसे 27 साल बाद स्कूटी चलाते नजर आया ताराचंद?
उत्तर प्रदेश के आगरा में ताराचंद शर्मा नामक एक व्यक्ति, जिसे 1998 में मृत घोषित कर गिरफ्तारी से बचने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया गया था, 25 साल बाद जीवित पकड़ा गया. वह स्कूटी चला रहा था और बैंक लेनदेन भी कर रहा था. शिकायतकर्ता ने उसे जीवित देख इस जालसाजी का पर्दाफाश किया. कोर्ट के आदेश पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.
उत्तर प्रदेश के आगरा में एक हैरान कर देने वाली घटना हुई है. यहां एक व्यक्ति, जिसकी 1998 में ही मौत हो गई थी, पलिस ने भी मौत को तस्दीक किया था, वहीं व्यक्ति 25 साल बाद इसी आगरा में ना केवल अपने नाम से स्कूटी खरीद कर चला रहा था, बल्कि बैंकों में अपने खुद के एकाउंट से लेनदेन भी कर रहा था. शिकायत पर आने पर कोर्ट ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि इस व्यक्ति ने 1999 में दर्ज एक मुकदमे में गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को मृत घोषित कर दिया था.
इस व्यक्ति की पहचान आगरा में गांधी नगर के रहने वाले ताराचंद शर्मा के रूप में हुई है. कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट कर जेल भेज दिया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. जानकारी के मुताबिक यहां रहने वाले राजकुमार वर्मा नामक व्यक्ति ने विद्या देवी के खिलाफ कूटरचित वसीयत तैयार कराने का मामला दर्ज कराया था. मामले की सुनवाई साल 1999 से ही कोर्ट में लंबित थी.
तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
मामले की सुनवाई के दौरान ही आरोपी विद्या देवी, चुन्नी लाल गोयल और रोशन लाल वर्मा की बीमारी से मौत हो गई. ऐसे में कोर्ट ने इन आरोपियों के खिलाफ तो कार्रवाई बंद कर दी, लेकिन इसी मामले में ताराचंद शर्मा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था. ऐसे में ताराचंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को मृत घोषित कर दिया. उसने साल 1998 में अपने नाम से बना एक मृत्यु प्रमाण पत्र भी साल 2013 में वकील के जरिए कोर्ट में दाखिल करा दिया. इसके बाद पुलिस ने भी अपनी आख्या लगा दी.
ऐसे हुआ जालसाजी का खुलासा
ऐसे में कोर्ट ने उसके खिलाफ भी कार्रवाई बंद कर दी. इसी बीच वादी राजकुमार वर्मा ने ताराचंद को 5 नवंबर 2025 को स्कूटी पर जाते देख लिया. उसने उसकी तस्वीर खींची और स्कूटी के नंबर के आधार पर उसके दस्तावेज भी निकलवा लिए. फिर बैंक से भी उसके खाते में लेनदेन की जानकारी हासिल कर कोर्ट में दाखिल कर दिया. इसके बाद कोर्ट ने फिर पुलिस से आख्या मांगी. यह खबर मिलते ही ताराचंद हाईकोर्ट पहुंच गया, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली. अब कोर्ट ने उसे जेल भेजने के आदेश दिए हैं.