अजय राय ने PM मोदी को लिखा पत्र; पूछा- ऊर्जा मंत्री की शिकायतें सही तो CM ने क्या कार्रवाई की?
उत्तर प्रदेश में बिजली संकट और ऊर्जा विभाग में आंतरिक टकराव पर कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. उन्होंने ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के बीच प्रशासनिक मतभेदों, 10% फ्यूल सरचार्ज, भर्ती और आरक्षण नियमों के उल्लंघन की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है.
उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के बीच प्रशासनिक मतभेदों, 10% फ्यूल सरचार्ज, भर्ती और आरक्षण नियमों के उल्लंघन की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है. राय ने कहा कि इस अव्यवस्था का खामियाजा जनता भुगत रही है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बिजली संकट अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सरकार के भीतर समन्वय और जवाबदेही की गंभीर विफलता का मामला बन चुका है. साथ ही पूछा कि अगर ऊर्जा मंत्री की शिकायतें सही हैं, तो मुख्यमंत्री द्वारा उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई? क्या ऊर्जा मंत्री को मुख्यमंत्री का विश्वास प्राप्त है?
ऊर्जा मंत्री और UPPCL में प्रशासनिक मतभेद
अजय राय ने आरोप लगाया कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और पावर कॉर्पोरेशन के बीच गंभीर प्रशासनिक मतभेदों का खामियाजा आम जनता भुगत रही है. उन्होंने पत्र में लिखा कि 12 जून को ऊर्जा मंत्री ने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंंने भर्ती, छंटनी, प्रशासनिक निर्णयों और फ्यूलसरचार्ज जैसे विषयों पर सार्वजनिक आपत्ति व्यक्त की.
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘अगर विभाग का राजनीतिक प्रमुख स्वयं यह कहने की स्थिति में पहुंच गया है कि उसकी जानकारी के बिना निर्णय लिए जा रहे हैं, तो यह सामान्य प्रशासनिक मतभेद नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है.’ उन्होंने इसी पर पूछा कि अगर ऊर्जा मंत्री की शिकायतें सही हैं, तो मुख्यमंत्री ने उनपर क्या कार्रवाई की?
UPPCL में भर्ती और छंटनी में भेदभावपूर्ण निर्णय
अजय राय ने यह भी कहा कि, ‘अगर ऊर्जा मंत्री शिकायतें निराधार हैं, तो उन्हें पद पर बनाए रखने का औचित्य क्या है? दोनों ही स्थितियों में यह प्रश्न अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री की जवाबदेही से जुड़ता है.’ इसके अलावा, आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन में भर्ती और छंटनी के मामलों में जाति और पंथ के आधार पर भेदभावपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं.
उन्होंने पत्र में पीएम मोदी से बिजली संकट, 10 प्रतिशत फ्यूलसरचार्ज की वसूली, ऊर्जा मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों, पावर कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली और विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों की अवहेलना के कथित उल्लंघनों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय
जांच कराने की मांग की है. ताकी मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और UPPCL के बीच उत्तरदायित्व निर्धारित हो सके.
