थाने में अंधेरा क्यों? CCTV फुटेज नहीं मिली तो HC का सख्त रुख, एसपी-SHO से जवाब तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के थाने में बिजली न होने और जेनरेटर खराब होने पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया, जिससे सीसीटीवी फुटेज की जांच भी नहीं हो सकी. हाईकोर्ट ने देवरिया के एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और एसएचओ को भी तलब किया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के भलुअनी थाने में बिजली व्यवस्था और खराब पड़े जेनरेटर को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि थाने जैसी संवेदनशील जगह का अंधेरे में रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है. अदालत ने इस मामले में देवरिया के एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि संबंधित थाने में बिजली न होने के कारण सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी. इस पर डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया कि सरकार की ओर से उपलब्ध कराया गया जेनरेटर आखिर क्यों काम नहीं कर रहा था और अगर खराब हो गया था तो उसे समय पर ठीक कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?
SHO को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पुलिस थाने का अंधेरे में रहना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता का भी परिचायक है. अदालत ने इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब तलब करते हुए एसपी देवरिया को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और संबंधित थाने के एसएचओ को तलब किया है.
कोर्ट ने भलुअनी थाना प्रभारी (SHO) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है. यह मामला नगेंद्र कुमार यादव द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि 3 अप्रैल 2026 को उन्हें भलुअनी थाने के लॉकअप में अवैध रूप से रखा गया था. कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज की मांग की तो सभी कैमरे बंद पाए गए.
जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो होगा एक्शन
मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने और बिजली व्यवस्था में खामियों के कारण अदालत ने इसे गंभीरता से लिया. जस्टिस अजीत कुमार और जज इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय की. कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया जा सकता है.