इस्तीफा तो दिया, पर शासन तक नहीं पहुंचा, क्या सच में रिकवरी के डर से प्रशांत कुमार ने कर दिया रिजाइन

जीएसटी डिप्टी कमिश्नर अयोध्या प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा अब तक शासन और राज्य कर आयुक्त कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है. इस्तीफा मिलने पर ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा. इस बीच प्रशांत कुमार पर कई गंभीर आरोप लग रहे हैं. ऐसे में शासन ने राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह की पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है.

जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार (फाइल फोटो)

पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन का शंकराचार्य अवुमक्तेश्वरानंद के साथ व्यवहार और यूजीसी के नए कानून के विरोध का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उसके बाद अयोध्या में राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने सीएम योगी के समर्थन और अवुमक्तेश्वरानंद के बयानों से आहत होने का हवाला देते हुए रिजाइन कर दिया.

सूत्रों के अनुसार प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा अभी शासन और राज्य कर आयुक्त कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है. इस्तीफा मिलने पर ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा. इस बीच शासन ने राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह की पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है. इसमें उनके खिलाफ चल रही जांच सहित सभी बिंदुओं शामिल किया गया है. मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशांत के सगे भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के जरिए नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगाया है.

सगे भाई ने ही प्रशांत कुमार सिंह पर लगाया गंभीर आरोप

डॉ. विश्वजीत का दावा है कि जांच का दबाव बढ़ने, नौकरी जाने और रिकवरी की कार्रवाई के डर से ही प्रशांत ने इस्तीफा दिया है. डॉ. विश्वजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 अगस्त 2021 को ही प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाणपत्र की जांच की मांग की थी. इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने उन्हें दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए नोटिस भेजा. लेकिन प्रशांत दोनों बार उपस्थित नहीं हुए.

डॉ. विश्वजीत ने TV 9 को बताया जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच कराने के निर्देश दिए गए थे.उनके मुताबिक प्रशांत ने आंखों की जिस बीमारी का हवाला देकर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया, वह बीमारी आमतौर पर 50 वर्ष की आयु से पहले नहीं होती. इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी.

स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में

उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतनपाल ने बताया कि इस प्रकरण में मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से पूरी जानकारी मांगी गई है. रिपोर्ट आने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा.मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि प्रशांत कुमार सिंह को 2021 में पहली बार नोटिस दिया गया था. इसके बाद दो और नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. अब नए सिरे से नोटिस जारी कर सप्ताह भर में जवाब मांगा गया है. जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें महानिदेशालय को अवगत कराया जाएगा.

परिवार का बैकग्राउंड

डॉ. विश्वजीत सिंह लखनऊ में निजी क्लिनिक चलाते. प्रशांत की बहन जय सिंह कुशीनगर की हाटा तहसील में तहसीलदार हैं. पैतृक गांव सरवां में उनके पिता त्रिपुरारी सिंह अकेले रहते थे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद घर पर ताला लगा हुआ है. प्रशांत कुमार सिंह ने इंटर तक की पढ़ाई अम्बेडकर नगर के टांडा से की है. यहां उनके पिता त्रिपुरारी सिंह एनटीपीसी में कार्यरत थे. बाद में पिता मऊ में बिजली निगम में लिपिक रहे.

प्रशांत ने स्नातक दिल्ली विश्वविद्यालय से किया और काफी वक्त तक मऊ में कोचिंग सेंटर भी चलाया. 2014-15 में सपा शासन काल में पीसीएस परीक्षा पास कर सेल टैक्स विभाग में नियुक्ति पाई. जीएसटी अधिकारी बनने से पहले वे राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं. 2011 में अमर सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकमंच के जिला अध्यक्ष थे. उनकी पत्नी पुलिस विभाग में दरोगा थीं, जिन्होंने भी हाल ही में इस्तीफा दे दिया है. फिलहाल जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है और इस्तीफे का मामला अब महज औपचारिकता से आगे बढ़कर गंभीर आरोपों की जांच का केंद्र बन गया है.

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