शादी के कार्ड पर QR कोड… रिश्तेदारों को भेजा निमंत्रण, कहा- आना जरूरी नहीं, ऑनलाइन भेजें शगुन

उत्तर प्रदेश के बागपत में एक दूल्हे ने शादी के कार्ड पर QR कोड छपवाकर अनूठी पहल की है. इसका उद्देश्य मेहमानों को देर रात यात्रा की परेशानी, दुर्घटनाओं के जोखिम और समय-धन की बर्बादी से बचाना है. अब रिश्तेदार घर बैठे QR कोड स्कैन करके ऑनलाइन शगुन भेज सकेंगे. यह कदम डिजिटल युग में शादी के निमंत्रण को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने का प्रयास है.

शादी के कार्ड पर छपवाया क्यूआर कोड

उत्तर प्रदेश के बागपत में एक शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस कार्ड पर क्यूआर कोड छपा है और रिश्तेदारों से आग्रह किया गया है कि बेवजह इस कार्यक्रम में आकर अपना समय और पैसा बर्बाद ना करें. बल्कि दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर घर बैठे ही वर-वधु को शगुन की राशि दे दें. बताया जा रहा है कि शादी के कार्ड पर क्यूआर कोड छपवाने का आइडिया खुद दूल्हे ने ही दिया है. पूछने पर उसने इसकी गंभीर वजह भी बताई है.

दूल्हे के मुताबिक आए दिन खबरें आ रही हैं कि देर रात शादी में आते या जाते समय एक्सिडेंट हो गया. यह एक विकट समस्या है और इस समस्या का समाधान उसने क्यूआर कोड के जरिए निकाला है. इस सुविधा लोगों को देर रात ट्रवेल करने और एक्सिडेंट के खतरे से मुक्ति तो मिलेगी ही, आने जाने में लगने वाले समय और धन की बर्बादी से भी उन्हें राहत मिल जाएगी. वहीं क्यूआर कोर्ड से वह घर बैठे ही दूल्हा दुल्हन को अपने आर्शीवाद स्वरुप शगुन की राशि दे सकेंगे.

आज बहन की तो कल खुद की है शादी

मामला बागपत के दोघट कस्बे का है. यहां रहने वाले आकाश बाल्मीकि की बहन की आज 7 फरवरी को बारात आ रही है. वहीं उनकी खुद की भी शादी कल यानी 8 फरवरी को है. आकाश ने दोनों शादियों का विवरण एक ही कार्ड पर क्यूआर कोर्ड के साथ छपवाया है.इसमें आग्रह किया है कि जो भी रिश्तेदार वर-वधु को कन्यादान, मुहदिखाई या अन्य रस्मों पर शगुन देना चाहते हैं, वो घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं.

सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा

आकाश के मुताबिक संभावित हादसों को टालने के लिए ही उसने शादी के कार्ड और क्यूआर छपवा दिया है. कार्ड भी उसने सभी रिश्तेदारों को व्यक्तिगत तौर पर घर जाकर देने के बजाय वाट्सऐप के जरिए भेजा है. उसने अपने रिश्तेदारों को सचेत करने की कोशिश की है कि बेवजह अपनी जिंदगी खतरे में नहीं डालनी. आकाश ने बताया कि उसके कई रिश्तेदार दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ में रहते हैं. उन्हें केवल शगुन देने के लिए इतना लंबा सफर तय करना पड़ता, लेकिन इस सुविधा से उन्हें बड़ी राहत मिल गई है.