पहली बार जली बल्ब… लखनऊ से सटे जिले के एक गांव में 78 साल बाद पहुंची बिजली
सुनने में हैरान लगेगा, लेकिन लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले का एक गांव में अब तक अंधेरा था. आज़ादी के 78 साल बाद पहली बार यहां बिजली पहुंची है. लोगों ने पहली बार अपने घरों में बिजली की रोशनी देखी. इसको लेकर पूरे गांव में उत्सव का माहौल है. ग्रामीणों ने बिजली आने के बाद इसे असली आजादी बताया.
देश को आज़ाद हुए करीब आठ दशक बीत गए, लेकिन बाराबंकी जिले के गढ़रियनपुरवा गांव ने आज पहली बार बिजली की रोशनी देखी. गढ़रियनपुरवा गांव जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर है. गांव में जैसे ही बिजली पहुंची, पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर राहत और खुशी साफ नजर आई.
ग्रामीण रोहित पाल ने कहा कि यह दिन उनके लिए किसी सपने के पूरा होने से कम नहीं है. गांव में बिजली न होने की वजह से शादी-ब्याह तक में मुश्किलें आती थी. लोग रिश्ते लेकर आते थे लेकिन गांव में अंधेरा देखकर लौट जाते थे. उनका कहना है कि ‘आज हम सच मायने में आज़ाद भारत में कदम रख पाए हैं.’ उन्होंने इसके असली आजादी बताया.
2017 में बिजली के खंभे लगे, 9 साल बाद पहुंची बिजली
बिजली आने से शिक्षा और शादी-ब्याह जैसी समस्याओं का अंत हुआ है. गांव की महिलाओं ने भी खुशी जाहिर की. एक महिला ने कहा कि अब उनके बच्चे रात में ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे. पहले दीये और मोमबत्ती की कमजोर रोशनी में पढ़ना मजबूरी थी. उन्होंने बताया कि बिजली नहीं होने के कारण गांव में लड़को की शादी तक मुश्किल हो जाती थी.
ग्रामिणों ने बताया कि 2017 में गांव में बिजली के खंभे तो लगा दिए गए थे, लेकिन तार खिंचने और कनेक्शन मिलने में करीब 9 साल लग गए. कई बुजुर्ग बिजली देखने की उम्मीद में दुनिया से चले गए. वहीं, ग्रामिणों ने इसके लिए समाजवादी पार्टी से सदर विधायक सुरेश यादव, जिलाधिकारी, बिजली विभाग के अधिकारियों और ग्राम प्रधान का आभार जताया.
कई प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें थी- सदर विधायक
मौके पर पहुंचे सदर विधायक सुरेश यादव ने बताया कि कुछ हिस्सा वन विभाग क्षेत्र में होने की वजह से सालों तक विद्युतीकरण अटका रहा. कई प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें थी. उन्होंने जिलाधिकारी, डीएफओ और बिजली विभाग के अधिकारियों का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि सबके सहयोग से आज यह संभव हो पाया हैं.