नाले ने निगल लिया बचपन… 47 घंटे बाद मिला मासूम प्रीत का शव; रो पड़ा पूरा शहर

बरेली में बारिश के दौरान नाले में बहे 6 वर्षीय दिव्यांग प्रीत को तीन दिन बाद मृत बरामद किया गया है. करीब 47 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्चे का शव मिलने से परिजनों में मातम छा गया. प्रीत तेज बारिश के दौरान घर के पास खेल रहा था. इस दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया.

नाले में गिरे मासूम प्रीत का शव बरामद हुआ Image Credit:

बरेली के आंवला कस्बे में मंगलवार को बारिश के दौरान नाले में बहा दिव्यांग मासूम प्रीत 47 घंटे बाद मृत मिला. तीन दिन तक चले लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गुरुवार को जब बच्चे का शव बाहर निकाला गया तो मौके पर मौजूद पिता और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया. इस दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर दिया है.

दरअसल, आंवला के मोहल्ला खेड़ा निवासी नंदराम प्रजापति का 6 साल का बेटा दिव्यांग बेटा प्रीत तेज बारिश के दौरान घर के पास खेल रहा था. इसी दौरान वह तेज बहाव के साथ खुले नाले में में समा गया. सूचना मिलते ही पुलिस, नगर पालिका, SDRF, फ्लड पीएसी और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और लगातार दिन-रात तलाश अभियान चलाया गया था.

पाइपों के अंदर तलाश में पुलिया तक तोड़नी पड़ी

बच्चे की तलाश के लिए नाले के कई किलोमीटर हिस्से की छानबीन की गई. जहां शक हुआ, वहां जेसीबी से खुदाई कराई गई. तहसील रोड के पास बनी पुलिया तक तोड़नी पड़ी ताकि बड़े पाइपों के अंदर भी तलाश की जा सके. स्थानीय गोताखोरों की मदद ली गई. अलग-अलग हिस्सों में सर्च अभियान चलाया. लेकिन फिर भी मासूम की जान नहीं बच सकी.

रेस्क्यू अभियान के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह लगातार अधिकारियों से जानकारी लेते रहे. नगर पालिका अध्यक्ष आबिद अली भी तीनों दिन मौके पर मौजूद रहे. अधिशासी अधिकारी प्रदीप गिरी ने पूरी रणनीति बनाकर अभियान को आगे बढ़ाया. प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लगातार मौके पर डेरा डाले रखा.

इकलौता सहारा भी छिन गया, पिता का बुरा हाल

प्रीत के शव के बाहर आते ही उसके पिता नंदराम बदहवास हो गए. मौके पर मौजूद लोग भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक सके. परिवार के लोगों ने बताया कि प्रीत की मां कई साल पहले ही घर छोड़कर चली गई थीं. इसके बाद पिता ही बेटे का पालन-पोषण कर रहे थे. अब इकलौते बेटे की मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है.

पूरे मोहल्ले में शोक का माहौल है और हर किसी की जुबान पर सिर्फ यही सवाल है कि काश मासूम को समय रहते बचाया जा सकता. पुलिस ने पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. प्रशासन ने परिजनों को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है.

खुले नालों पर उठे सवाल, प्रसाशन ने लोगों की मांग

करीब 47 घंटे तक चले इस अभियान में दो जेसीबी मशीनें, SDRF, फ्लड पीएसी, फायर ब्रिगेड, नगर पालिका, पुलिस, स्थानीय गोताखोर और पुलिस टीमें लगातार लगी रहीं. यदि मशीनों, ईंधन, कर्मचारियों की ड्यूटी और अन्य व्यवस्थाओं का सामान्य अनुमान लगाया जाए, तो पूरे अभियान पर करीब 2 से 5 लाख रुपये तक का सरकारी खर्चा आया है.

हालांकि, ये खर्च मासूम की जान के सामने कौड़ी बराबर है. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में खुले नालों और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए खुले नालों को सुरक्षित किया जाए, ताकि किसी अन्य परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े.

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