‘सांप्रदायिकता बढ़ रही है, इसलिए नौकरी छोड़ राजनीति में आना चाहता हूं…’, सिपाही का त्यागपत्र वायरल

बरेली पुलिस से कुछ महीनों पहले जीआरपी से अटैच किए गए सिपाही मोहम्मद जमशेद का त्यागपत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि देश और प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बढ़ रहा है. वह लोगों के बीच आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता के लिए काम करना चाहते हैं. राजनीति में एंट्री लेना चाहते हैं. इसलिए रिजाइन दे रहे हैं.

सिपाही जमशेद

बरेली जिले के फतेहगंज पूर्वी थाने से तीन महीने पहले जीआरपी से अटैच किए गए एक हेड कांस्टेबल का त्यागपत्र इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पत्र में हेड कांस्टेबल ने देश में बढ़ रही सांप्रदायिकता को नौकरी छोड़ने और राजनीति में आने की वजह बताया है. लेटर सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल बढ़ गई और मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंची.

दरअसल, हेड कांस्टेबल मोहम्मद जमशेद ने अपने त्यागपत्र में लिखा कि वह पुलिस विभाग में लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं. उन्हें नौकरी के दौरान सम्मान भी मिला, लेकिन वर्तमान सामाजिक माहौल को देखते हुए वह अब राजनीति के जरिए समाज में काम करना चाहते हैं. पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि देश और प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बढ़ रहा है. वह लोगों के बीच आपसी सौहार्द और सामाजिक एकता के लिए काम करना चाहते हैं.

त्यागपत्र का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसकी चर्चा तेज हो गई. इसके बाद पुलिस विभाग के अधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और हेड कांस्टेबल से संपर्क किया. विभागीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि पत्र औपचारिक प्रक्रिया के तहत दिया गया है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की जानी है.

जीआरपी से रिलीव किए गए, अब मूल विभाग करेगा फैसला

बताया गया कि मोहम्मद जमशेद मूल रूप से मुरादाबाद जिले के मैनाठेर थाना क्षेत्र के गांव मुरेर के रहने वाले हैं. उनकी पत्नी सरकारी शिक्षक हैं. वह वर्ष 2011 में पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे. अलग-अलग जिलों में सेवा देने के बाद हाल ही में उनकी ड्यूटी जीआरपी में लगाई गई थी.

साल 2026 में जीआरपी से किए गए थे अटैच

सूत्रों के अनुसार, मार्च 2026 से वह एक वर्ष की अवधि के लिए जीआरपी में अटैच किए गए थे. त्यागपत्र का पत्र सामने आने और चर्चा बढ़ने के बाद जीआरपी स्तर पर उनसे जानकारी ली गई. प्रारंभिक बातचीत में उन्होंने पत्र को अपना बताया. इसके बाद उन्हें उनके मूल विभाग के लिए रिलीव कर दिया गया है.

बरेली पुलिस लेगी सिपाही के इस्तीफे पर फैसला

अब आगे की कार्रवाई बरेली पुलिस प्रशासन के स्तर से तय की जाएगी. विभागीय नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी का त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार नहीं होता, बल्कि उसकी जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाती है. ऐसे मामलों में कर्मचारी से बातचीत और काउंसलिंग भी की जाती है ताकि निर्णय पूरी तरह स्पष्ट स्थिति में लिया जा सके.

एसएसपी अनुराग आर्य ने क्या कहा?

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर विभागीय स्तर तक पहुंच चुका है और लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. हालांकि अभी तक त्यागपत्र स्वीकार किए जाने को लेकर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है. पूरे मामले में बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि इस मामले की जानकारी मिली है. यदि त्यागपत्र हमारे पास आता है तो नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी. संबंधित कर्मचारी की काउंसलिंग भी कराई जाएगी. उसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा.

Follow Us