बरेली के नीरज गुप्ता ने आखिर क्यों राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु? DM को सौंपा प्रार्थना पत्र

बरेली के 60 वर्षीय बुजुर्ग ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है. तीन साल पहले एक हादसे में पैर गंवाने के बाद, वे विकलांग हो गए और इलाज व मदद के लिए दर-दर भटके. अब उन्हें जिंदगी बोझ लगने लगी है, जिसके चलते उन्होंने यह भावुक कदम उठाया है. बुजुर्ग ने डीएम को प्रार्थना पत्र सौंपा है.

बरेली में इच्छा मृत्यु की गुहार: नीरज गुप्ता ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र,

बरेली के रामपुर गार्डन में रहने वाले 60 साल के नीरज गुप्ता अब जिंदगी से पूरी तरह हार चुके हैं. तीन साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक चुके नीरज सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे. जहां राष्ट्रपति के नाम संबोधित प्रार्थना पत्र डीएम को सौंपकर इच्छा मृत्यु की मांग कर दी. उनका कहना है कि अब उनके पास जीने की कोई वजह नहीं बची है.

नीरज गुप्ता ने बताया कि तीन साल पहले लाल फाटक स्थित परशुराम मंदिर में बड़ा हादसा हुआ था. मंदिर की छत गिरने से वह उसके नीचे दब गए थे. हादसा इतना गंभीर था कि डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए एक पैर काटना पड़ा. कई दिन तक वह कोमा में रहे. उस हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. अब उन्हें अपनी जिंदगी बोझ लगने लगी है.

‘अब इस दुनिया में मेरा कोई अपना नहीं बचा’

अब हालत यह है कि वह ठीक से चल भी नहीं पाते. एक पैर कट जाने की वजह से उन्हें हर छोटे काम के लिए दूसरों का सहारा लेना पड़ता है. उन्होंने बताया कि इलाज और सहायता के लिए कई बार अधिकारियों के दफ्तर गए, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि चक्कर लगाते-लगाते चप्पल घिस गई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की.

नीरज गुप्ता ने बेहद भावुक होकर बताया कि अब इस दुनिया में उनका कोई अपना नहीं बचा. परिवार में जितने लोग थे, सभी एक-एक कर दुनिया छोड़ चुके हैं. वह अकेले जिंदगी काट रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले पिता कहा करते थे कि तुम अकेले हो, अपने हिसाब से जिंदगी जीना, लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें सहारा देने वाला भी कोई नहीं है.

दर्द, अकेलापन और अधिकारियों की अनदेखी

उन्होंने बताया कि विकलांग होने के बाद जिंदगी और मुश्किल हो गई. लोग उन्हें बोझ की तरह देखने लगे हैं. कई बार रिक्शा वाले भी बैठाने से मना कर देते हैं. सरकारी दफ्तरों में घंटों इंतजार करने के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिलता है. न इलाज पूरा हो पाया और न कोई आर्थिक मदद मिली. अब जिंदगी से कोई मोह नहीं रह गया है. न कोई लालच और न कोई उम्मीद.

उन्होंने बताया कि शरीर लगातार बीमारियों से जूझ रहा है. सुनने और देखने की क्षमता भी पहले से काफी कमजोर हो चुकी है. ऐसे में वह खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करते हैं. शारीरिक दर्द, अकेलापन और अधिकारियों की अनदेखी ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है. 60 साल के नीरज गुप्ता ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में अपनी पूरी पीड़ा बताई जाहिर की है.

मंदिरों में सेवा की, अब मदद को तरस रहे नीरज

नीरज गुप्ता ने बताया कि उन्होंने देहरादून से बीकॉम की पढ़ाई की है. जिंदगी के कई साल धार्मिक और सामाजिक सेवा में बिताए. उन्होंने भगवान परशुराम धाम, राधा कृष्ण मंदिर और आनंद आश्रम समेत कई धार्मिक स्थानों पर सेवा कार्य किया.
उन्होंने बताया कि परिवार में पहले पांच भाई और चार बहनें थीं, लेकिन अब कोई साथ नहीं है.

नीरज गुप्ता ने लंबे समय तक न्याय और मदद की उम्मीद करने के बाद जब कहीं से राहत नहीं मिली तो उन्होंने इच्छा मृत्यु की मांग की है. फिलहाल उनका प्रार्थना पत्र प्रशासन के पास पहुंच गया है. अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन उनकी मदद के लिए क्या कदम उठाता है या फिर यह बुजुर्ग आगे भी इसी तरह दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर रहेगा.

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