ओवरलोड, जर्जर तार और ब्रेकडाउन… यूपी में बिजली की कमी नहीं, सिस्टम है वजह!
उत्तर प्रदेश भीषण गर्मी में बिजली संकट से जूझ रहा है, जहां ओवरलोडेड सबस्टेशन, जर्जर नेटवर्क और भारी वितरण नुकसान मुख्य कारण हैं. ऐसा नहीं है कि यूपी में उपलब्ध बिजली की कमी है. लेकिन तकनीकी खामी और लापरवाही से जनता परेशान है. जब तक बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं होता, समस्या बनी रहेगी.
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और बिजली कटौती को लेकर जनता परेशान हैं. लखनऊ से लेकर कई जगह आज भी बिजली की समस्या बनी हुई है और लोगों का हंगामा जारी है. राजाजीपुरम अप्ट्रान विद्युत उपकेंद्र पर बिजली गुल होने पर हंगामा हुआ. हालात बिगड़ते देख बिजली कर्मियों को कार्यालय में खुद के बंद होने पर मजबूर होना पड़ा.
लखनऊ के टिकैत राय तालाब इलाके में घंटों बिजली संकट से लोगों में भारी नाराजगी है. सूचना पर पहुंची पुलिस ने मोर्चा संभालकर स्थिति को काबू किया. लेकिन हर साल हो रही इस परेशानी के पीछे ठोस आंकड़े और तकनीकी कमियां हैं. चलिए, यूपीपीसीएल और यूपीईआरसी के आधिकारिक आंकड़ों से इस संकट का असली सच समझते हैं.
ओवरलोड और जर्जर नेटवर्क सबसे बड़ी वजह
इस बिजली संकट की सबसे बड़ी वजह ‘ओवरलोडेड सबस्टेशन’ है. पूरे उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 3.7 करोड़ उपभोक्ता हैं. इन उपभोक्ताओं का कुल स्वीकृत लोड 8.57 करोड़ किलोवाट है, लेकिन इसके मुकाबले सबस्टेशनों की कुल क्षमता महज 6.25 करोड़ किलोवाट ही है. इसका मतलब है कि सिस्टम अपनी क्षमता से 2.32 करोड़ किलोवाट ज्यादा का भारी-भरकम लोड झेल रहा है.
जब सिस्टम पर औकात से ज्यादा दबाव पड़ेगा, तो ट्रिपिंग और अघोषित कटौती होना लाजमी है. वहीं, दूसरा बड़ा विलेन ‘जर्जर लोकल नेटवर्क’ है. यूपी के विशाल ग्रिड में करीब 18 लाख ट्रांसफॉर्मर दौड़ रहे हैं. अच्छी बात ये है कि बिजली विभाग की मुस्तैदी से इनके जलने का आंकड़ा घटा है. जहां 2022-23 में 7,322 ट्रांसफॉर्मर फुके थे, वहीं 2025-26 में ये संख्या घटकर 2,613 रह गई. सुधार तो है… लेकिन ग्राउंड जीरो पर संकट अब भी बरकरार है.
बिजली की कमी नहीं, फिर भी बत्ती गुल क्यों?
यूपीपीसीएल की मानें तो लोकल लेवल पर बत्ती गुल होने के पीछे 4 बड़े कारण हैं- ओवरलोडिंग, असंतुलित लोड, आए दिन होने वाले लाइन फॉल्ट और रखरखाव यानी Maintenance की भारी कमी. यानी जब तक बिजली का ये इंफ्रास्ट्रक्चर और सबस्टेशनों की कैपेसिटी भारी-भरकम लोड के बराबर नहीं होगी, तब तक रुकावट बनी रहेगी.
यूपी में बिजली कटौती की असली वजह बिजली की कमी नहीं, बल्कि कुछ और ही है. आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में बिजली की पीक डिमांड करीब 33 हजार 849 मेगावाट है जबकि उपलब्धता 38 हजार 240 मेगावाट है. यानी जरूरत से 13% ज्यादा बिजली मौजूद है, फिर भी राज्य में बत्ती गुल है. इसका असली कारण डिस्ट्रीब्यूशन यानी वितरण का नुकसान है.
यूपी में जनता अंधेरे में रहने को मजबूर क्यों?
राज्य में औसतन 19 दशमलव पांच चार फीसदी बिजली ग्राहकों तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाती है. इसके तीन बड़े कारण हैं, सप्लाई के दौरान बर्बादी, बिजली चोरी और बिल न भरना. अगर इलाकों के हिसाब से देखें तो पूर्वांचल में सबसे ज्यादा 21.4% का नुकसान है. मध्यांचल में 19.2%, दक्षिणांचल में 18.8% और सबसे कम पश्चिमांचल में 15.6% का लॉस है.
साफ है, बिजली भरपूर है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही और चोरी के कारण जनता अंधेरे में रहने को मजबूर है. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि कि ABC कंडक्टर घटिया गुणवत्ता के लगाए गए हैं. अंडर कैपासिटी के लगाए गए हैं. तीनों के ऊपर की प्लास्टिक जलेगी तो तीन फेज मिल जाएंगे, शॉर्ट सर्किट होगा फिर ट्रांसफॉर्मर भी फुक जाते हैं. 75% ब्रेकडाउन बिजली कंडक्टर की वजह से हुए हैं.
(टीवी9 ब्यूरो रिपोर्ट)
