‘हम गौ सेवा कर रहे थे, बदले में मिला बुलडोजर’… बरेली में गौशाला की महिलाओं का छलका दर्द
बरेली में कामधेनु गौशाला पर बुलडोजर कार्रवाई से 35 गोवंश और कई विधवा महिलाएं बेघर हो गईं. TV9 की रिपोर्ट में महिलाओं ने न्याय और अपने हिस्से की गुहार लगाई, आरोप लगाया कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. उनके समक्ष आजीविका और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है.
बरेली में प्रेमनगर थाना क्षेत्र के मौलानगर स्थित कामधेनु गौशाला ट्रस्ट पर बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की बुलडोजर कार्रवाई के बाद वहां रहने वाली महिलाओं का दर्द सामने आया है. पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के बाद उनके सिर से छत छिन गई है. अब उन्हें अपने बच्चों और गौवंश के भविष्य की चिंता सता रही है.
स्थानीय लोगों की शिकायत पर बीडीए ने करीब 30 साल पुरानी गौशाला पर कार्रवाई की. शिकायत में आरोप था कि गौशाला पार्क की जमीन पर बनी हुई थी. कार्रवाई के दौरान मौके पर गौशाला संचालक संजीव गौड़ भी मौजूद रहे और उन्होंने इसका विरोध किया. इस बीच TV9 की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, जहां बुलडोजर एक्शन के बाद का मंजर दर्दनाक था.
‘बच्चों के साथ सम्मान से रहने का मौका मिले’
टीवी9 भारतवर्ष की टीम जब मौके पर पहुंची तो बुलडोजर की कार्रवाई के बाद पूरा परिसर मलबे में तब्दील दिखाई दिया. गौशाला में 35 से अधिक गोवंश मौजूद थे. घरेलू सामान, राशन, वाहन और अन्य जरूरी सामान भी मलबे के बीच बिखरा पड़ा था. सबसे ज्यादा दर्द उन महिलाओं के चेहरे पर दिखा, जो सालों से गौशाला परिसर में रह रही थीं.
एक महिला ने बताया कि तीन साल पहले उनके पति की मौत हो चुकी है. इसके बाद से ससुराल पक्ष उन्हें प्रताड़ित कर रहा है और घर से निकालने का दबाव बना रहा है. उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर यह घर बसाया था. वह सिर्फ अपना हिस्सा चाहती हैं ताकि अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ सुरक्षित रह सकें. किराए पर रहने की भी आर्थिक स्थिति नहीं है.
वहीं. दूसरी महिला ने भी प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई. उन्होंने कहा कि उनके हिस्से का अधिकार उन्हें मिलना चाहिए. आए दिन झगड़े होते हैं, उन पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं और पुलिस में शिकायतें की जाती हैं. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ इतना चाहती हैं कि प्रशासन उन्हें उनका कानूनी हक दिलाए और बच्चों के साथ सम्मान से रहने का मौका मिले.
मुख्यमंत्री कहते हैं कि गौ सेवा करो, लेकिन जब हम…
महिलाओं ने कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा, “मुख्यमंत्री कहते हैं कि गौ सेवा करो, लेकिन जब हम गौ सेवा कर रहे हैं तो हमारी गौशाला पर बुलडोजर चलाया जा रहा है.” उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की और जबरन बाहर निकाल दिया. उनका कहना है कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखना चाहती हैं.
फिलहाल बीडीए का कहना है कि कार्रवाई सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत के आधार पर की गई है. वहीं, गौशाला में रह रहे लोगों और महिलाओं की मांग है कि उनके अधिकारों और वहां मौजूद गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. लेकिन सवाल है कि 35 से ज्यादा गोवंश का क्या होगा और गौशाला में रह रही इन महिलाओं का भविष्य क्या होगा?
