रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा कानपुर का लाल! ड्रोन हमले में मर्चेंट नेवी अफसर की मौत
कानपुर के मर्चेंट नेवी चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन हमले से मौत हो गई. नेवी ऑफिस अपने पीछे पत्नी, दो बच्चों और मां को छोड़ गए हैं. वहीं, इस खबर के बाद से परिवार गहरे सदमे में है. वे सरकार से पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने की अपील कर रहे हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध की आग ने कानपुर के एक परिवार की खुशियां छीन लीं. शहर के 30 साल के मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले में मौत हो गई. इस खबर के बाद परिवार गहरे सदमे में है. घर में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.
परिजनों के अनुसार, सागर गुप्ता ‘एवन नेविगेटर’ कंपनी के जरिए मर्चेंट नेवी में चीफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे. बताया गया कि 18 जुलाई को उनका जहाज रूस की ओर जा रहा था. इसी दौरान जहाज पर ड्रोन हमला हुआ. परिवार का कहना है कि हमले के समय सागर जहाज के डेक पर मौजूद थे और उसकी चपेट में आने से उनकी मौत हो गई.
21 जुलाई को मिली परिवार को घटना की सूचना
परिवार को इस घटना की जानकारी 21 जुलाई को मिली. हालांकि, उनका कहना है कि अब तक उन्हें केवल मौखिक सूचना मिली है. न तो शिपिंग कंपनी और न ही किसी सरकारी विभाग ने घटना की आधिकारिक पुष्टि या कोई दस्तावेज उपलब्ध कराया है. इसी वजह से परिवार लगातार चिंता और अनिश्चितता के बीच दिन गुजार रहा है.
सागर गुप्ता अपने पीछे मां रमा गुप्ता, पत्नी शालू गुप्ता, पांच साल की बेटी गौरी और सात महीने के बेटे कृष्ण को छोड़ गए हैं. पिता रूप नारायण गुप्ता का पहले ही निधन हो चुका है. अब परिवार पर दुखों का एक और पहाड़ टूट पड़ा है. मासूम बच्चों को शायद अभी यह भी समझ नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है.
सरकार से पार्थिव शरीर को वापस लाने की गुहार
सागर के बड़े भाई मनीष गुप्ता और उनकी चारों बहनें लगातार केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से मदद की अपील कर रहे हैं. उनकी मांग है कि सागर के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाया जाए, ताकि पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जा सके. साथ ही, परिवार चाहता है कि सरकार मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे.
