8 लेन होगी बरेली-पीलीभीत रोड, 2010 पेड़ों का होगा पुर्नवास; इतना आएगा खर्च
बरेली-पीलीभीत रोड को 8-लेन करने की परियोजना से शहर में विकास होगा. 116 करोड़ की लागत से बनने वाली इस सड़क पर 2010 पेड़ों को काटा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें 'एंटायर ट्री ट्रांसप्लांटेशन' तकनीक से सुरक्षित दूसरी जगह लगाया जाएगा. इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सड़क चौड़ीकरण की पुरानी चुनौती भी हल होगी. यह योजना यूपी में विकास और हरियाली के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है.
उत्तर प्रदेश का बरेली शहर में विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलने की कोशिश के तहत पीलीभीत रोड के चौड़ीकरण में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सेटेलाइट चौराहे से बैरियर टू तक करीब 7.9 किलोमीटर लंबे हिस्से को चार लेन से बढ़ाकर आठ लेन किया जाएगा. इस सड़क के चौड़ीकरण परियोजना की अनुमानित लागत 116 करोड़ रुपये है. इसमें खास बात यह है कि सड़क के रास्ते में आने वाले करीब 2010 पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें दूसरी जगह सुरक्षित तरीके से पुर्नवासित किया जाएगा.
इस काम के लिए आंवला क्षेत्र के हिम्मतपुर में करीब सात एकड़ जमीन तय की गई है. यहां इन पेड़ों को दोबारा से लगाया जाएगा.इस ट्रांसप्लांटेशन कार्य पर लगभग 4.02 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इस सड़क के चौड़ीकरण की मांग लंबे समय से चल रही थी. चूंकि इस सड़क के किनारों पर पेड़ लगे थे, इसलिए काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब सरकार ने इस समस्या का समाधान खोज लिया है.
पुराने पेड़ थे चुनौती
इस रोड के सर्वे में सामने आया कि सड़क के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में पुराने और घने पेड़ लगे हैं. इनमें कुछ पेड़ पांच साल पुराने हैं तो कुछ की उम्र करीब 50 साल से भी अधिक है. इनमें पीपल, पाकड़, बरगद, शीशम, जामुन और बेल जैसे वृक्ष शामिल हैं. प्रशासन ने इन्हें काटने के बजाय एंटायर ट्री ट्रांस प्लांटेशन तकनीक अपनाने का फैसला किया है. इस प्रक्रिया में पेड़ को उसकी जड़ों समेत मशीनों की मदद से निकाला जाएगा और दूसरी जगह दोबारा से लगा दिया जाएगा.
एक पेड़ पर 20 हजार का खर्च
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक पेड़ को शिफ्ट करने में करीब 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है. इसके लिए जेसीबी, क्रेन और ट्रैक्टर जैसी मशीनों का उपयोग किया जाता है. बरेली विकास प्राधिकरण बीडीए इस काम के लिए वन विभाग और दिल्ली की एक निजी एजेंसी से बातचीत कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई गई है ताकि सड़क भी बेहतर बने और हरियाली भी बनी रहे.
