‘CJP प्रोटेस्ट में गया, इसलिए नौकरी छीन ली’, बरेली में असिस्टेंट प्रोफेसर का गंभीर आरोप

बरेली के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उन्हें छात्र आंदोलन का समर्थन करने और जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के कारण नौकरी से हटा दिया गया. उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर बिना नोटिस और जांच किए कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताया. साथ ही डीएम से जांच की मांग की है.

छात्र आंदोलन में शामिल होने के कारण नौकरी से निकाला: प्रोफेसर

बरेली के बहेड़ी स्थित गन्ना उत्पादक (स्नातकोत्तर) महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित भारद्वाज ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद उन्हें बिना किसी नोटिस के नौकरी से हटा दिया गया. प्रोफेसर ने अब मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सेवा बहाल करने की मांग की है.

डॉ. मोहित भारद्वाज ने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना-पत्र में कहा है कि कॉलेज प्रशासन ने बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए, बिना विभागीय जांच कराए और बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं. उनका आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह सेवा नियमों के विपरीत है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है.

11 जुलाई 2024 को ग्रहण किया था कार्यभार

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि उनकी नियुक्ति महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्वीकृति के बाद 20 जून 2024 को हुई थी. उन्होंने 11 जुलाई 2024 को कार्यभार ग्रहण किया था. उनके अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने उन्हें पहचान पत्र भी जारी किया था, जिसकी वैधता 30 जून 2027 तक है. इससे साफ है कि नियुक्ति नियमित प्रक्रिया के तहत हुई थी.

उन्होंने यह भी दावा किया कि 20 मई 2026 को कॉलेज प्रशासन ने उनके कार्य और आचरण की सराहना करते हुए प्रशंसा-पत्र भी दिया था. लेकिन कुछ ही समय बाद अचानक उनकी सेवा समाप्त कर दी गई. प्रोफेसर का कहना है कि अगर उनके खिलाफ कोई शिकायत या आरोप था तो उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था.

‘बिना सुनवाई के नौकरी से हटाना नियमों के खिलाफ’

प्रार्थना-पत्र में डॉ. भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि छात्र आंदोलन के समर्थन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कॉलेज प्रबंधन ने उनके खिलाफ यह कार्रवाई की. बिना सुनवाई का मौका दिए नौकरी से हटाना नियमों के खिलाफ है. भारद्वाज ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे से भी मुलाकात की. उन्होंने मामले को सदन में उठाने की बात कही.

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भारद्वाज ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो उनकी सेवा बहाल की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. फिलहाल इस मामले में कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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