2023 में इंटरव्यू तक पहुंचीं, 2024 में प्रीलिम्स भी नहीं निकला… जानें कैसे सुरभि यादव ने UPSC में हासिल की 14वीं रैंक
उत्तर प्रदेश के बरेली की सुरभि यादव ने UPSC (सिविल सेवा परीक्षा 2025) में 14वीं रैंक हासिल कर इतिहास रचा है. पुलिस इंस्पेक्टर की बेटी सुरभि ने चौथे प्रयास में यह सफलता पाई. 2024 में प्रीलिम्स में फेल होने से लेकर 14वीं रैंक तक का सफर, जानें कैसे IAS बनीं सुरभि यादव.
उत्तर प्रदेश के बरेली की बेटी सुरभि यादव ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में शानदार सफलता हासिल कर शहर और परिवार का नाम रोशन किया है. सुरभि ने इस कठिन परीक्षा में देशभर में 14वीं रैंक प्राप्त की है. खास बात यह है कि उन्होंने यह मुकाम अपने चौथे प्रयास में हासिल किया. वह साल 2023 में इंटरव्यू तक पहुंची थीं, और 2024 में तो वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) भी पास नहीं कर पाई थीं.
25 वर्षीय सुरभि यादव इस समय दिल्ली में केंद्र सरकार के युवा कल्याण एवं खेल मंत्रालय के तहत चल रहे माय भारत कार्यक्रम में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने इसी साल जनवरी में यह पद संभाला है. उनकी इस उपलब्धि से बरेली में खुशी का माहौल है, वहीं परिवार और रिश्तेदारों में भी जश्न जैसा माहौल बन गया है.
पिता से मिली प्रेरणा, बचपन में ही तय कर लिया था लक्ष्य
सुरभि की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है. उनके पिता राकेश यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में वाराणसी में तैनात हैं. एक पुलिस अधिकारी के रूप में पिता की मेहनत और अनुशासन को देखकर ही सुरभि ने बचपन से ही बड़ा लक्ष्य तय कर लिया था. सुरभि बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था. इसी वजह से उन्होंने 11वीं कक्षा में ही मानविकी (आर्ट्स) विषय चुन लिया था.

उनकी स्कूली पढ़ाई अलग-अलग स्कूलों से हुई, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका समर्पण हमेशा बना रहा. स्कूल के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज के समय से ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का मन बना लिया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया के कोचिंग बैच को ज्वॉइन किया.
कई बार असफलता का सामना करना पड़ता- सुरभि यादव
सुरभि के अनुसार, यूपीएससी की तैयारी आसान नहीं होती. इसमें कई बार असफलता का सामना करना पड़ता है, लेकिन हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. उन्होंने भी कई उतार-चढ़ाव देखे. सुरभि ने बताया कि यह उनका चौथा प्रयास था. 2024 में तो वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) भी पास नहीं कर पाई थीं. इससे पहले 2023 में उन्होंने प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों चरण पार कर लिए थे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया था.

हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी. इसी बीच प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से उनका चयन युवा कल्याण एवं खेल मंत्रालय के माय भारत कार्यक्रम में उपनिदेशक पद के लिए हो गया. उन्होंने जनवरी में यह पद संभाला और नौकरी के साथ ही अपनी तैयारी भी जारी रखी. उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और इस बार यूपीएससी 2025 में उन्होंने 14वीं रैंक हासिल कर ली.
समय गिनकर पढ़ाई से ज्यादा जरूरी, अपना लक्ष्य तय करें
सुरभि बताती हैं कि जब उन्होंने अपने चयन की खबर घर पर दी तो सबसे ज्यादा भावुक उनकी मां हो गईं. मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. वहीं पिता राकेश यादव भी बेटी की सफलता सुनकर भावुक हो गए. वह कहती हैं कि पिता का संघर्ष और अनुशासन उनके लिए हमेशा प्रेरणा रहा है. सुरभि का मानना है कि यूपीएससी की तैयारी में समय गिनकर पढ़ाई करने से ज्यादा जरूरी है कि आप अपना लक्ष्य तय करें और उसी के अनुसार लगातार मेहनत करते रहें.
