विधवा पेंशन घोटाले में फसेंगे अफसर! बिना सत्यापन पास किए थे आवेदन, हो सकती है अरेस्टिंग
बरेली के आंवला में विधवा पेंशन घोटाले की जांच अब अफसरों तक पहुंच गई है. बिना सत्यापन के फर्जी आवेदन पास करने वाले अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं. मां और उसकी दो बेटियों की गिरफ्तारी के बाद, अब तीन अन्य नाम भी सामने आए हैं. यह घोटाला जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर किया गया था.
उत्तर प्रदेश में बरेली के आंवला में विधवा पेंशन घोटाले में नया मोड़ आ गया है. इस मामले में एक मां और उसकी दो बेटियों की गिरफ्तारी के बाद जांच के दायरे में कुछ अफसर भी आ गए हैं. इस मामले में इन तीन महिलाओं की अरेस्टिंग के अलावा अब तीन नए नाम सामने आए हैं. इनमें से दो पहले से ही दूसरे मुकदमे में जेल में बंद हैं. अब पूरे मामले में आवेदन की जांच और सत्यापन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका खंगाली जा रही है.
मामले की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई थी, जब अनुपुरा गांव की रहने वाली हसीना ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया कि गांव के अच्छन खां जीवित हैं, लेकिन उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनकी पत्नी अन्नी और बेटियों सन्नो व स्वालीन ने विधवा पेंशन का लाभ ले लिया. तीनों ने अलग-अलग आवेदन में एक ही व्यक्ति को अपना पति बताते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगाए और पेंशन स्वीकृत करा ली.
एसडीएम ने कराई जांच
शिकायत के बाद आंवला एसडीएम ने जांच कराई. जांच में सामने आया कि अच्छन खां तो जीवित हैं, लेकिन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से पेंशन ली गई है. उस समय तक तीनों के खातों में करीब 51 हजार रुपये की पेंशन पहुंच चुकी थी. इसके बाद विभाग ने पेंशन रोकते हुए सरकारी धन की रिकवरी शुरू कर दी. जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय की ओर से नवंबर 2025 में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी धन हड़पने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था.
पुलिस की जांच में सामने आए ये नाम
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी मां और दोनों बेटियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. वहीं जांच में आंवला के टांडा निवासी आसिफ, बसंत विहार निवासी हरीश कुमार और फतेहगंज पश्चिमी के एक अन्य व्यक्ति का नाम भी सामने आया. इनमें आसिफ और हरीश पहले से ही दूसरे मुकदमे में जेल में बंद हैं, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश जारी है. इस मामले ने विधवा पेंशन स्वीकृत करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बिना सत्यापन पास हुए आवेदन
नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्र के आवेदनों का स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन बीडीओ स्तर पर किया जाता है. इसके बाद संबंधित अधिकारी की संस्तुति मिलने पर ही पेंशन स्वीकृत होती है. लेकिन इस मामले में न तो सही तरीके से जांच हुई और न ही दस्तावेजों का सत्यापन किया गया. इस प्रकार फर्जी आवेदन स्वीकृत हो गए और सरकारी धन का भुगतान भी होता रहा. अब यह पता किया जा रहा है कि आवेदन किस स्तर पर बिना जांच के आगे बढ़ाए गए और किन अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा संभव हुआ.
एक्शन में पुलिस
एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि विधवा पेंशन फर्जीवाड़े में मां और उसकी दो बेटियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. विवेचना के दौरान तीन अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं. इनमें से दो अन्य मामले में पहले से जेल में हैं, जबकि तीसरे फरार आरोपी की तलाश की जा रही है. मामले की जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.