हो रही थी तालाब की खुदाई, तभी प्रकट हो गया शिवलिंग! शुरू हो गई पूजा
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में तालाब की खुदाई के दौरान एक प्राचीन शिवलिंग मिला है. इस खोज ने स्थानीय लोगों में धार्मिक आस्था जगा दी है, जिन्होंने इसे स्वयंभू शिवलिंग बताया है. खुदाई रोककर पूजा-अर्चना शुरू हो गई है और अब लोग इस स्थान पर भव्य मंदिर बनाने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, अभी तक पुरातत्व विभाग ने इसकी जांच नहीं की है.
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक हैरान करने वाली घटना हुई है. यहां शिकारपुर क्षेत्र के मोहल्ला मुफ्तीबाड़ा स्थित दौज वाले तालाब की खुदाई के दौरान एक शिवलिंग मिला है. इस सूचना से मौके पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए. खुदाई का काम रोक दिया गया और मौके पर सुरक्षा घेरा बनाकर पूजा पाठ शुरू हो गया है. अब स्थानीय लोगों ने इस शिवलिंग को स्वयंभू बताकर इस स्थान पर मंदिर बनाने की मांग कर रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक गांव में तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए रविवार को खुदाई हो रही थी. इसी दौरान तालाब के मध्य में एक शिवलिंग मिल गया. इसकी सूचना गांव में पहुंची तो लोग भागकर तालाब पर पहुंचे और मौके पर धार्मिक आस्था का माहौल बन गया. लोगों ने भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए पूजा- अर्चना, जलाभिषेक शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों ने बताया कि तालाब की खुदाई के दौरान मिट्टी में एक उभरी हुई आकृति दिखाई दी. लोगों ने सोचा कि कछुआ है, लेकिन मिट्टी हटाने पर पत्थर की संरचना नजर आई.
फावड़े से भी नहीं हुआ कोई नुकसान
इसके बाद खुदाई कर इस संरचना को बाहर निकाला गया तो यह पूरा का पूरा शिवलिंग था. लोगों का कहना है कि खुदाई के दौरान कई बार फावड़ा भी शिवलिंग पर लगा, लेकिन इसपर खरोंच तक नहीं आई है. स्थानीय लोगों ने दावा है कि इसी क्षेत्र में पहले जल निकासी के लिए खुदाई के दौरान कुछ शंख भी मिले थे. सूचना मिलने पर नगर पालिका चेयरपर्सन राजबाला सैनी और वार्ड सभासद कपिल कुमार आर्य ने मौका मुआयना किया. फिर लोगों की डिमांड को देखते हुए मौके पर ईंट और सीमेंट का अस्थायी घेरा बना दिया गया.
उठी मंदिर बनाने की मांग
इतने में सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. मौके पर मौजूद लोगों ने इस शिवलिंग को स्वयंभू बताते हुए अब इस स्थान पर मंदिर बनाने की मांग की है. हालांकि अभी तक प्रशासन या पुरातत्व विभाग की ओर से इस शिवलिंग की कोई जांच पड़ताल नहीं की गई है. इसलिए अभी यह प्रमाणित नहीं हो सका है कि यह शिवलिंग कितना प्राचीन है या फिर इसका कोई पुरातात्विक महत्व भी है.
