अब डॉ. शाहीन के हर राज होंगे बेनकाब, आज लखनऊ-कानपुर ला सकती है NIA
दिल्ली ब्लास्ट केस की आरोपी डॉक्टर शाहीन सईद को NIA आज लखनऊ और कानपुर लेकर आ सकती है. इन दोनों जगहों से जुड़े डॉक्टर शाहीन के कई राज खुल सकते हैं. इसके अलावा 13 लड़कियों से उसके कनेक्शन का असलियत भी सामने आ सकती है.
लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए विस्फोटक धमाके की जांच में बड़ा मोड़ आ गया है. फरीदाबाद से विस्फोटक के साथ गिरफ्तार पूर्व मेडिकल फैकल्टी डॉ. शाहीन शाहिद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) मंगलवार को कड़ी सुरक्षा में लखनऊ और कानपुर ला सकती है.
ट्रांजिट रिमांड के दौरान पूछताछ से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ के कई राज खुल सकते हैं. खासकर उसके साथ जुड़ी 13 किशोरियों की भूमिका, चोरी की पुरानी कारों का इस्तेमाल और संवेदनशील इलाकों में सक्रिय संदिग्ध मोबाइल नंबरों का कनेक्शन. यह पूछताछ यूपी में JeM के महिलाओं वाले विंग को पूरी तरह बेनकाब कर सकती है.
डॉ. शाहीन का ‘डबल लाइफ’
लखनऊ के कैसरबाग स्थित कंधारी बाजार की रहने वाली डॉ. शाहीन (जिन्हें ‘मैडम सर्जन’ भी कहा जाता था) ने 1996-2005 के बीच प्रयागराज से एमबीबीएस और एमडी पूरा किया. यूपीपीएससी के जरिए 2006 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर बनी. 2009-10 में कन्नौज मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर हुईं, लेकिन 2013 में बिना नोटिस दिए नौकरी छोड़ कर गायब हो गई थी.
उसके बाद फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी एंड हॉस्पिटल में फार्माकोलॉजी की फैकल्टी रही. यहां उसका संपर्क पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) के डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई (32) से हुआ, जो JeM के लिए विस्फोटक जमा कर रहा था. 9 नवंबर को मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद डॉ. शाहीन की स्विफ्ट कार से एक AK-47 राइफल (जिसकी कीमत 6.5 लाख रुपये बताई जा रही है) और अमुनिशन बरामद हुआ.
JeM की महिला गैंग की मुख्य हैंडलर थी शाहीन
NIA सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन JeM की ‘जमात-उल-मुमिनात’ (महिलाओं का विंग) की प्रमुख हैंडलर थीं. वह किशोरियों को रेडिकलाइज कर भर्ती करती थीं और फंडिंग का इंतजाम करती थीं. गिरफ्तारी से पहले वह सऊदी अरब यात्रा के बहाने दुबई भागने की फिराक में थीं.कई फर्जी पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की.
10 दिन की NIA कस्टडी में 4 आरोपी
20 नवंबर को पाटियाला हाउस कोर्ट ने डॉ. शाहीन समेत चार मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल अहमद राथर (अनंतनाग), और मौलवी इरफान अहमद वागय (शोपियां) को 10 दिन की NIA कस्टडी में भेजा. ये सभी अल-फलाह इंस्टीट्यूट में काम करते थे और ‘शिक्षित आतंक’ के मॉड्यूल का हिस्सा थे. राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन (NMC) ने 14 नवंबर को इन चारों डॉक्टरों की रजिस्ट्रेशन रद्द कर दी.
फर्जी बैंक खाते: 20 लाख की फंडिंग
जांच में डॉ. शाहीन से जुड़े एनजीओ के आधा दर्जन फर्जी बैंक खाते ‘मनी म्यूल’ के रूप में सामने आए. ये खाते यूपी, फरीदाबाद की 13 किशोरियों और दिहाड़ी मजदूरों के नाम पर खुले थे. खाताधारकों ने कबूल किया कि उन्हें मासिक रकम (500-1000 रुपये) का लालच देकर खाते खुलवाए गए, लेकिन ट्रांजेक्शन की डिटेल्स नहीं बताई गईं.
NIA को शक है कि विदेश (संभवतः पाकिस्तान से JeM के जरिए) आई फंडिंग—करीब 20 लाख रुपये.इसी चक्र से विस्फोटक खरीदने, लैब सेटअप और ऑपरेटिव्स को ट्रांसफर की गई. डॉ. शाहीन ने क्राउडफंडिंग चैनलों से लगातार फंड जुटाया, जो मॉड्यूल की ‘लाइफलाइन’ था. अब इन खातों के सोर्स JeM या अंसार गजवात-उल-हिंद से जुड़े—का पता लगाया जा रहा है.
कश्मीरी संदिग्धों पर नकेल, दो हिरासत में
कानपुर के गम्मू खां हाटा इलाके में NIA-ATS की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. यहां मेवा, गर्म कपड़े बेचने वाले कई कश्मीरी रहते हैं. दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया; इनके दस्तावेज सत्यापित हो रहे हैं. कई मकान मालिकों ने किरायेदारों को बिना वेरिफिकेशन के रखा था, जो अब फरार हैं. खुफिया एजेंसियां (IB), लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) और पुलिस अलर्ट पर हैं. सोमवार को चोरी की पुरानी कारें (रेकी के लिए इस्तेमाल) और संदिग्ध मोबाइल नंबर ट्रेस किए गए. लखनऊ में डॉ. शाहीन के भाई परवेज अंसारी (इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लेक्चरर) के घर पर छापे में लैपटॉप, मोबाइल और हार्ड ड्राइव जब्त हुए.
